गांव का पानी गांव में रोकर करें जल संचय -पुलिस महानिदेशक

मीरजापुर, 09 अक्टूबर, 2017- पुलिस महानिदेशक, तकनीकी सेवायें उ0प्र0 महेन्द्र मोदी ने कहा कि गांव के खेत का पानी गांव में रोककर जल संचय करें ताकि पानी का जल स्तर ंउपर आ सके। श्री मोदी आज पुलिस लाइन के मनोरंजन सभागार में जिले के सभी अधिकारियों के साथ एक गोष्ठी में जल कम खर्च पर जल संचयन के बारे में जानकारी दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जल संचयन के लिये मृतपा्रय कुपों, तालाबों, हैण्डपम्पों तथा गांव से निकलने वाले नालों का जीर्णोद्वार करना होगा। उन्होंने कहा यह कार्य गांव के लोगों के द्वारा श्रम दान से ही कम समय व कम खर्च से सम्भव हो सकता है। कुपों व तालाबों के जीर्णोद्वार के लिये उन्होंने कहा कि प्रायः देखा जाता है वर्षा के समय खेत का पानी बहकर नालों व नदियों में बह जाता है और हमारा खेत याउसके पास पानी रूक नहीं पाता जिसके कारण से खेतों के आस-पास का जल स्तर काफी नीचे चला जाता है। उन्होंने बताया यदि खेत के ढलान पर कुछ तकनीकी तरीके से कूप बनाकर वर्षा के जल को रोका जा सकता है जिससे बाद जहां उस पानी से खेत की सिंचाई की जा सकती है वहीं आस-पास के जल स्तर को भी ंउपर लाया जा सकता है। जल संचयन के बारे में उन्होंने कहा गांवों के तालाबों को ग्राम प्रधान श्रम दान के द्वारा जीर्णाद्वार कराये तथा उसमें आस-पास के पानी आने का रास्ता भी बनाये तालाबों के जीर्णोद्वार के द्वारा भी पानी क ेजल स्तर को सही किया जा सकता है। कहा कि अक्सर वाष्पीकरण के द्वारा तालाबों व कुओं का पानी उड जाता है उसे भी राकेने की आवश्यकता है ताकि अधिक दिन तक पानी रोका जा सके। श्री मोदी ने सुझाव दिया कि कुओं को पानी निकालने की जगह बनाते हुये श्ेड के द्वारा ढका जाये ताकि तालाब व कूओं का पानी वाष्प बनकर उड न सके। जलाशयों को संरक्षित कर वर्षा के पानी का रोका जा सकता है।
पुलिस महानिदेशक ने सभी ग्राम प्रधानों को जल संरक्षण मुहिम चलाने का आह्वान करते हुये कहा कि बिना पानी के जीवन जीना मुश्किल हो जायेगा इसलिये सभी का प्रयास होना चाहिए कि पानी का संरक्षण किया जा जाये। छतों पर जल संचयन के लिये की जाने वाली व्यवस्था पर बल देते हुये कहा कि छतों के पानी को रोक कर उसे एक छोटी नाली के द्वारा टंकी में लाया जाये और टंकी के मुहाने पर जाली के माध्यम से पानी का छानें ताकि उसके डस्ट न आने पाये उस पानी का को फिल्टर कर पीने के योग्य बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पानी रोकने के लिये तकनीकी विधि के बारे में भी जानकारी दी। श्री महेन्द्र ने बताया गांवों में शौचालयो की संख्या बढ रही है उसके लिये भी पानी की जरूरत होगा उसी शौचालय के छत पर वर्षो का पानी रोककर जल प्रबन्ध किया जाये एवं टंकी में इकट्ठा कर उसका उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कम स्थान में प्रदूषण रहित जल प्रबन्धन कैसे किया जाये इस बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अपने सम्बोधन मे कहा कि वर्षा जल संचय कर साल भर शुद्ध जल घरेलू आवश्यकता में कैसे लाया जाये, घरों में बिना बिजली जलापूर्ति कैसे किया जाये, जल प्लावन की समस्या से निपटने, नालो की संरचना बेहतर जल प्रबन्धन के लिये कैसी रखी जाये इस सभी के बारे में विस्तृत लानकारी दी।
इस अवसर पर आई0जी0 जोन प्रेम प्रकाश, पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी, मुख्य विकास अधिकारी पिंयका निरंजन, डी0एफ0ओ0 ने भी अपने अनुभवों को लोगों को बताया तथा जल संचय के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर अधिशासी अभियन्ता जल निगम, सभी ग्राम पंचायत अधिकारी, पहाडी क्षेत्रों के ग्राम प्रधान, ई0ओ0 मीरजापुर, कछवां के अलावा अन्य सभी सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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