सड़क निर्माणकार्य प्रारम्भ होने के पूर्व घोटाले बाज हुए सक्रीय-MIRZAPUR

सर्वे के बाद, प्रकाशन के पहले,कृषि भूमि , आबादीभूमि में हुई दर्ज*-
परियोजना निदेशक का दूसरा पत्र मिलते ही जाँच हुई प्रारम्भ

अदलहाट मिर्जापुर
राष्ट्रीय राज मार्ग-7 वाराणसी से हनुमना मध्य प्रदेश तक फोरलेन सड़क प्रस्तावित होने के बाद अधिकारीयों की मिली भगत से कृषि जमीन को आवादी में दर्ज कराकर,व मकान,टीनशेड, निर्माण करके मुवावजा लेने के फ़िराक में लगे है।
जिलाधिकारी ने जाँच टीम गठित कर मौके पर जाकर जाँच करने का आदेश दिया।जिससे अब भारी रकम खर्च कर कृषि जमीन को आवादी में दर्ज कराने वाले भू-स्वामी भूमाफियाओं में हड़कम्प है।
सर्वे के पहले कृषि भूमि सर्वे के बाद उसी जमीन को आवादी में दर्ज किये जाने के खुलासे के बाद जागी जिला प्रशासन ने जाँच के आदेश आखिरकार दे ही दिया।शनिवार को रसुलागंज, छोटामिज़ापुर,बहादुरपुर, बघेरा,दर्रा, प्रतापपुर,काशीपुर, सहसपुरा,दिझितपुर, पचेवरा,कैलहट, सहित सड़क के किनारे सर्वे के बाद बनाये गये नये निर्माण का फोटो ग्राफी किया।

सबसे अधिक निर्माण कार्य टेंगड़ा मोड़ से नरायनपुर ,परसोधा कैलहट ,जमुई बाईपास में जाने वाली भूमि पर धड़ल्ले के साथ निर्माण कराकर ,कृषि जमीन को राजस्व विभाग के साथ मिलकर आवादी में दर्ज कराकर करोड़ो रुपये घोटाला का खेल चल रहा था। लेकिन खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आई जिला प्रशासन ने जाँच सुरु कर दी है।
भू स्वामियों ने दी सफाई- प्रकाशन के कुछ दिन पहले का आबादी दर्ज है, हमें आबादी का मुवावजा मिलना चाहिए, नही तो जमीं नही देंगे।

प्राधिकरण की अनुमति के विना कृषि भूमि को आवादी में किया दर्ज*

जमीन का भू-उपयोग कृषि है इसका भू-उपयोग विना प्राधिकरण की सहमती से बदली नहीं जा सकती है।लेकिन कुछ अधिकारीयों के मिली भगत से लम्बी रकम लेकर कृषि भूमि को सड़क सर्वे के बाद आवादी में दर्ज करने का खेल जारी है।
कृषि भूमि की कीमते आवादी से कम हैं।इस लिए कृषि जमीन को आवादी में दर्ज करने से इसकी कीमत कई गुना जा रहा है।

परियोजना निदेशक ने लिखा था पत्र

परियोजना निदेशक ने बतलाया कि 16 सितम्बर को जिला प्रशासन को पत्र लिखकर जाँच का आदेश दिया था।लेकिन जाँच सुरु नहीं किया गया था जिलाधिकारी को दूसरी पत्र जारी कर जाँच का आदेश दिया था है।और एक रिमांडर भी भेजा गया है।

एसीईओ से जाँच कराने की मांग
नोएडा में बन रहे यमुना एक्स्प्रेस वे के किनारे 6 जिलो में अरबों की जमीन को आबादी में दर्ज करने के घोटाले के मामले में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ)को जाँच सौपी गयी है।इस लिए इसकी भी जाँच एसीईओ से कराई जाय जिससे हकीकत को सामने लाकर कार्यवाही की जा सके।
राष्ट्रिय मार्ग सात वाराणसी मंडल के परियोजना निदेशक ने जानकारी दी कि 28 जुलाई को गजट व 5 अगस्त समाचार पत्र में नोटिस प्रकाशन के बादआवास का निर्माण अवैध माना गया है, जांच कराकर अवैध निर्माण को चिन्हित किया जा रहा है।

सर्किट रेट का अजब खेल …..

यदि रसुलागंज व छोटा मिर्जापुर का कृषि सर्किट रेट 82278 रुपया प्रति विस्वा जबकि आबादी रेट 6 लाख 20 हजार प्रति विस्वा है , काशीपुर का कृषि सर्किट रेट 45 हजार569 रुपये जबकि आबादी रेट 5लाख 32हजार प्रति विस्वा है।प्रताप पुर का कृषि सर्किट रेट 45569 रुपया प्रति विस्वा जबकि आबादी रेट 4लाख 55 हजार चार सौ है। पचेवरा का कृषि सर्किट रेट 45 हजार569 रुपया,जबकि आबादी रेट 2लाख 90हजार950 रुपया है।कैलहट का कृषि सर्किट रेट 45 हजार 569 रुपया है।जबकि आबादी रेट 5लाख 81 हजार नौ सौ रुपये शासन के द्वारा निर्धारित है।तो कई गुना अंतर होने के कारण कृषि जमीन को आबादी में दर्ज कराये जाने का खेल खेला जा रहा है

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