9453821310-मिर्ज़ापुर- कर्नल अनिल कुमार ने आज मिर्ज़ापुर के भू राजस्व अधिकारी ,ADM ,एसपी ,DJ ,CMO कार्यालय के डॉक्टर्स प्रशासनिक आला अधिकारियों व पत्रकारों के साथ भी मनाया सेना झण्डा दिवस | सात दिसम्बर यानी आज भारत की सेनाओं के लिए एक और अहम दिन है। इस दिन पर पूरा देश आम फोर्सेज फ्लैग डे या सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के जरिए उन्हें याद करता है। आर्म्ड फोर्सेज फ्लैड डे की शुरूआत वर्ष 1949 में हुई थी और इसका मकसद सेनाओं को उनका सही सम्मान देना था। कर्नल अनिल कुमार ने बताया की इस दिन के माध्यम से देश रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान करने वाले सैनिकों की शहादत को भी नमन किया जाता है। पत्रकार वीरेंद्र गुप्ता ने कहा की सात दिसम्बर 1949 से हर वर्ष इसी तारीख पर इसे मनाना एक परंपरा है। इस दिन के जरिए सैनिकों के कल्याण के लिए फंड भी इकट्ठा किया जाता है।जानकारी के मुताबिक़ अब सरकार के पास फंडिंग पर्याप्त है| कर्नल अनिल कुमार ने इस दिन की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा की सन् 1947 को मिली आजादी के बाद सरकार के सामने सैनिकों के रख-रखाव के लिए जरूरी पैसे की कमी आई। 28 अगस्त, 1949 को रक्षा मंत्री के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई। इस कमेटी की ओर से हर वर्ष सात दिसम्बर को झण्डा दिवस मनाने का आइडिया दिया गया। झण्डा दिवस के जरिए लोगों में छोटे-छोटे झण्डे दिए जाते और उनके बदले डोनेशन ली जाती। आम नागरिकों में सैनिकों के परिवारों के देखभाल की जिम्मेदारी की भावना को पैदा करना इसके अहम मकसद में से था। झण्डा दिवस वह एक दिन है जब आप सैनिकों और उनके परिवार वालों के कल्याण के लिए 10 रूपये से लेकर 10 लाख रूपये तक दे सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सैनिकों के योगदान और उनकी कोशिशों को सामने लाया जाता है। देश में केन्द्रीय सैनिक बोर्ड भी रक्षा मंत्रालय का ही एक हिस्ता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संदेश में कहा ”सशस्त्र बल झण्डा दिवस पर, मै आप सभी से हमारे सशस्त्र बलों के कल्याण के लिए उदारता से दान देने की अपील करता हूँ, जो रात-दिन हमारे राष्ट्र की सेवा करते हैं। देशभक्ति की भावना के साथ हर फर्ज पूरा किया है। उनका निस्वार्थ असाधारण है।“कर्नल के साथ जवाहर लाल विश्वकर्मा,दसवंत सिंह,अरुण सिंह,असलय खान आदि ने भी सेना झण्डा दिवस मनाने में सक्रियता दिखाई |