सोनम ,आर्यन के आंसू का हिसाब कौन करेगा?-MIRZAPUR

किसी संस्थान को व्यक्तिगत नहीं होना चाहिए वरना वही होगा जो मिर्जापुर के इन चारों छात्रों शिवानी ,सोनम ,आर्यन ,व अंकित के साथ हुआ है। इन बच्चों के आंसू का हिसाब कौन करेगा? क्या इनका भविष्य अधर में मान लिया जाए ।स्कूल से निकाले महीनों हो गए ,अब न कोई होमवर्क, न कोई स्कूली दोस्त, ना घंटी ,न हीं रिसेस। जब इनके आंसू निकल रहे थे तो लग रहा था कि बच्चों से उनका बचपना छीने जाने का भय मानो उनको भी सता रहा हो ।विद्यालय कौन सी शिक्षा देगा बच्चों को? या यूं कहें कि यह बच्चे जीवन की यह सच्चाई सीख कर क्या करेंगे। उनका नजरिया समाज ,मास्टर व स्कूल के प्रति क्या होगा? ये छात्र जिनको महज इसलिए स्कूल से निकाल दिया गया और परीक्षा से वंचित कर दिया गया है कि उनका फीस जमा नहीं है। बच्चों के अभिभावक की माने तो बच्चों का फीस पहले ही माफ किया गया था ।और विद्यालय की मानें तो फीस बकाया के कारण स्कूल से निकाल दिया गया है। पर पड़ोसियों की माने तो ये इन बच्चों के ऊपर जमीनी विवाद के कुप्रभाव का परिणाम है। दरअसल बच्चों के अभिभावक व विद्यालय के प्रबंधक एक दूसरे के मकान मालिक और किराएदार बताए गए हैं ।जिनका विवाद न्यायालय में विचाराधीन है ।परंतु विवाद का दुष्परिणाम से इन चारों बच्चों के भविष्य को दांव पर लगाया जा रहा है ।मामला कुछ भी हो मगर परीक्षा से वंचित होने के जो आंसू है वह किस परिणाम को जन्म देंगे यह सभी की जुबान से सुना जा रहा है।
जहां पूरी सरकार बच्चों को शिक्षित करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया हो वहीं पर मिर्जापुर में जो घटना घटी है वह उन तमाम सामाजिक व्यवस्था को आश्चर्य में डालने के लिए पर्याप्त कहा जा सकता है मिर्जापुर देहात कोतवाली थाना क्षेत्र के निवासी राजकुमार विश्वकर्मा के चार बच्चे हैं उन चारों में सबसे बड़ी लड़की शिवानी जो भी कक्षा 11 में उम्र 16 वर्ष की, सोनम कक्षा 7 और आर्यन कक्षा 7 उसी तरीके से अंकित कक्षा 4 की पढ़ाई क्या अब नहीं कर पायेगा ? इस वर्ष उनका खराब होने जा रहा है विद्यालय प्रशासन ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया है मीडिया से बात करते वक्त आंख से आंसू इस तरीके से गिर रहे थे मानो दुख की पहाड़ इन बच्चियों के ऊपर टूट गया हो| जिनको यह पता चल गया कि अब हमारी पढ़ाई नहीं हो पाएगी ऐसे में जो बच्चे स्कूल जाया करते थे, हंसते-हंसते अपनी सहेलियों अपने दोस्तों से मिल बैठकर पढ़ाई की योजना बनाते थे उन बच्चों को क्या पता कि पिता और स्कूल प्रबंधन की लड़ाई का खामियाजा उन को भुगतना पड़ेगा इन चारों बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया है इन चारों बच्चों के पिता ने जो आरोप लगाया है वह सुनकर सभी हैरत में पड़ जाएंगे कि क्या मात्र फीस ना जमा करने की वजह से परीक्षा से वंचित किया जा सकता है| यह यक्ष प्रश्न समाज में उन तमाम परिवार में आज गूंज रहा है जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर नहीं है |जानकारी के मुताबिक स्कूल का प्रबंधन व इन चारों बच्चों के गार्जियन के बीच मकान मालिक व किराएदारी का विवाद है उसके साथ ही साथ बच्चों को यह कहकर बाहर निकाला गया की फीस जमा नहीं है अब सवाल कुछ भी हो चाहे किरायेदारी मकान मालिक का विवाद के चलते इन बच्चों का भविष्य खराब हो रहा हो या फीस के अभाव में भविष्य खराब हो रहा हो सामाजिक जिम्मेदारी के नाते उन तमाम स्वयंसेवी संस्थाओं तमाम प्रशासनिक अधिकारियों को इस मामले पर आगे आना चाहिए वरना इन चारों बच्चों का भविष्य बर्बाद होने से कोई रोक नहीं सकता ,क्योंकि पढ़ाई निरंतर होना आवश्यक है जिस बच्चे की या जिस पढ़ने वाले छात्र की पढ़ाई ही घंटा या 1 दिन भी रुक जाता है तो उसको फिर रिकवर करना बहुत मुश्किल होता है आज इन बच्चों ने ना सिर्फ स्कूल छोड़ा है बल्कि भविष्य में ना पढ़ने की विचार अगर इनके ख्याल में घर कर लेगा जो इन चारो बच्चों का भविष्य को कौन संभालेगा कैसे उज्जवल भविष्य होगा उनका जहां सरकार १-१ बच्चों को स्कूल जाने की शिक्षा का अभियान निरंतर लगा रही है अथक प्रयास किए जा रहे हैं तमाम सरकारी व्यवस्था से बताया जा रहा हो की कोई भी बच्चा स्कूल जाने से ना छूटे ऐसे में शहर में इस विद्यालय के बच्चों को बाहर का रास्ता दिखाकर तमाम उन लोगों के होश फाख्ता कर दिए जो यह दावा करने से नहीं कतराते कि चाहे बेटा हो या बेटी सबको शिक्षा मिलना चाहिए ऐसे में बड़ा प्रश्न यही है कि कैसे इन के साथ न्याय होगा फिलहाल उनके परिजन और अपने चारों बच्चों को लेकर पूरा परिवार इन बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है उनके पिता ने बताया कि और कहीं एडमिशन हो नहीं रहा है |

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