इस पावन मौके पर बेल के पेड़ अवश्य लगाए-रानी सेठ

मिर्ज़ापुर बीजेपी नेत्री रानी सेठ ने जनपदवासियो को महाशिवरात्री के इस अवसर बधाई देते हुए कहा की भगवान शिव का अभिषेक अनेकों प्रकार से किया जाता है। जलाभिषेक : जल से और दुग्‍धाभिषेक : दूध से। बहुत जल्दी सुबह-सुबह भगवान शिव के मंदिरों पर भक्तों, जवान और बूढ़ों का ताँता लग जाता है वे सभी पारंपरिक शिवलिंग पूजा करने के लिए आते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं। भक्त सूर्योदय के समय पवित्र स्थानों पर स्नान करते हैं जैसे गंगा, या (खजुराहो के शिव सागर में) या किसी अन्य पवित्र जल स्रोत में। यह शुद्धि के अनुष्ठान हैं, जो सभी हिंदू त्योहारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पवित्र स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहने जाते हैं, भक्त शिवलिंग स्नान करने के लिए मंदिर में पानी का बर्तन ले जाते हैं महिलाओं और पुरुषों दोनों सूर्य, विष्णु और शिव की प्रार्थना करते हैं मंदिरों में घंटी और “शंकर जी की जय” ध्वनि गूंजती है। भक्त शिवलिंग की तीन या सात बार परिक्रमा करते हैं और फिर शिवलिंग पर पानी या दूध भी डालते हैं।तो वही चुनार सेवा समिति के सचिव व समाज सेवी आशीष यादव ने विंध्य छेत्र के शिवपुर के प्राचीन शिव मंदिर पर प्रकाश डालते हुए इस्सकी प्राचीन दंतकथा के बारे में बताया की इसको भगवान् राम ने स्वयं इस्थापित किया है जिसकी महत्ता अपने आप में अदिव्तीय है|मन माँगी मुरादे यहाँ अवश्य पूरी होती है यदि सच्ची मन से भक्त शिव भगवान् का स्मरण करता है |बेल पत्र और बेल फल की अपार महत्व होने के बावजूद इस पेड़ के घटती संख्या पर चिंता भी जाहिर करते हुए कहा की हमें आनी वाली पीढ़ियों के लिए बेल के पेड़ को लगाते रहना चाहिए हम सभी को प्रण लेने चहिये की इस पावन मौके पर बेल के पेंड को अवश्य लगाए |

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