जो ज्ञान है वही ईश्वर का स्वरुप है-नारायणानन्द तीर्थ महाराज

मिर्जापुर मंडलान्तर्गत सिटी ब्लॉक रायपुर पोख्ता में चल रहे शिवशक्ति महायज्ञ एवं शिवगीता के माध्यम से काशी धर्म पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानन्द तीर्थ महाराज ने कहा अपने धर्म और कर्तव्य को छोड़ देना मनुष्य का धर्म नही है संपूर्ण विश्व सृष्टि का सार भगवान् शिवशक्ति का सौंदर्य है संपूर्ण सृष्टि में जो भी दिखाई पड़ रहा है वह ईश्वर की विभूति हैं स्वामी जी ने कहा समस्त विद्याओं का कारणभूत भगवान शिव ही हैं भारत का अद्वैत दर्शन सर्वमान्य है एक ही शक्ति सभी में दैदीप्यमान है अपनी आत्मा के द्वारा सूक्ष्म आत्मा को नही जाना जा सकता ईश्वर को तर्क के द्वारा नही जा सकता अपनी आत्मा ही परमात्मा के बारे में अकाट्य प्रमाण है जिस ईश्वर ने हमें यह शरीर दिया है उसे लेने का भी अधिकार ईशावास्यमिदं सर्वं जो जिस से उत्पन्न होता है उसी में लय भी हो जाता है सूक्ष्म से स्थूल बनता है महाराज जी ने कहा वेड का अर्थ ज्ञान है और जो ज्ञान है वही ईश्वर का स्वरुप है और बिना श्रद्धा के परमात्मा को जाना नही जा सकता सोई जानई जेहि देहु जनाई सृष्टि का आदि और अंत ईश्वर ही है उन्ही के संकल्प मात्र से उत्पत्ति और लय होता है मनुष्य को सदैव अपना कर्तव्य करते रहना चाहिए कर्तव्य का पालन ज्ञान में बाधक नहीं है। सूक्ष्म से स्थूल बनता है और वाष्प से जल बनता सूक्ष्म तत्व ही ईश्वर का स्वरुप है जिस पर ईस्वर कृपा करते है उसे एकात्म द्रष्टि प्रदान करते है गुरु कृपा बिना सात्विक ज्ञान को प्राप्त नही किया जा सकता संसार को सत्य मान लेना ही भ्रान्ति है और जो सत्य को नही जानते वह भ्रम में ही बने रहते है अज्ञानी लोग स्वतः की मान्यता को बनाये रखते है मनुष्य में चेतना का विकास जल्दी होता है।”बड़े भाग मानुष तन पावा” स्वार्थी और भोगी लोग अपनी कामना पूर्ति के लिए दूसरों को कष्ट पहुचते हैं । इससे पूर्व महाराज जी की पादुका पूजन का कार्य गुरुपीठ परम्परा अनुसार सविधि सम्पन्न हुआ जिसमें कार्यक्रम के मुख्य आयोजक हरिश्न्द्र शुक्ला ग्राम प्रधान,शारदा प्रसाद शुक्ल, राजेश्वर शुक्ल,अशोक शुक्ल,कमलेश शुक्ल,बंशी शुक्ला, नागेंद्र दुबे सहित समस्त ग्रामवासियों और क्षेत्रवासियों ने पुजन अर्चन कर कथा श्रवण किया

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