मानसिक आपातकाल जैसी स्थिति-अध्यक्ष

MIRZAPUR-9453821310 आयकर व्यापार कर अधिवक्ता संघ की एक अति आवश्यक आकस्मिक बैठक संघ के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कर मथुरा प्रसाद मैनी की अध्यक्षता में तेलियागंज स्थित वाणिज्य कर कार्यालय मिर्जापुर में संपन्न हुई जिसमें खेद व्यक्त किया गया कि पूर्व में प्रेषित प्रस्ताव पर विचार करने तथा शासन द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं की गई जबकि प्रस्ताव जनहित में महत्वपूर्ण रहा है जिसमें निम्नलिखित प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार को प्रस्ताव प्रेषित करने का पुनः निर्णय लिया गया।
1. यह कि जीएसटी प्रणाली को धीरे धीरे सरकार को लागू किया जाना चाहिए था। ताकि लोग इसके अभ्यस्त हो सके। लेकिन केंद्र सरकार ने उसे एकदम से व्यापारियों पर जल्दीबाजी में ठोक दिया है ।इसलिए अभी अधिनियम के प्रावधानों के लागू किए जाने में शिथिलता बरतने चाहिए। जिससे कोई गलती ना हो पाए ।अभी प्रारंभ में मार्च 2018 तक कर दाताओं के विरुद्ध देरी या त्रुटि के लिए कोई भी विधिक कार्यवाही लेट फीस/ ब्याज/ पेनल्टी नहीं लेनी चाहिए।
2. यह कि 1.5 करोड रुपए तक के नीचे के व्यापारियों के लिए रजिस्ट्रेशन संशोधन एवं समाधान की कार्यवाही को छोड़कर शेष सभी कार्यवाही एवं विवरण दाखिल करने चालान जमा करने की वैकल्पिक व्यवस्था यानी मैनुअल /ऑनलाइन दोनों से किसी भी विधि द्वारा किया जाए जैसा कि पूर्व के अधिनियम में था ।जैसा कि छोटे-छोटे व्यापारियों के लिए यह संभव नहीं है कि वह अपना जीएसटी रिटर्न ई फाइलिंग द्वारा अनिवार्य रूप से दाखिल करें ।जबकि वैट कर के रिटर्न दाखिल स्थिति यह है कि इसमें कर दा, वकील व संबंधित वर्ग के लोग बराबर मानसिक दबाव में रहते हैं और जीएसटी के अलावा और कुछ कार्य नहीं कर सकते हैं ।हर समय केवल जीएसटी की याद आती है ।ऐसा भयानक स्थिति जीएसटी की है ।यदि कोई व्यापारी बीमार हो जाए या घर में कोई अति आवश्यक कार्य आ जाए तो वह बाहर नहीं जा सकता और ना ही वह अपना इलाज करा ही सकता है। क्योंकि प्राथमिकता जीएसटी रिटर्न है ना कि जीवन सुरक्षा। अधिवक्ता जीएसटी के चलते वैट व आयकर का कार्य नहीं कर पा रहे हैं ।इतना समय नहीं है कि वह अन्य के बारे में सोच सके।
जीएसटी प्रणाली में करदाताओं ,अधिवक्ताओं व अकाउंटेंट को काफी मानसिक पीड़ा हो रही है। इसलिए इसे वैकल्पिक यानी मैनुअल या फाइलिंग दोनों में से किसी भी विधि से जीएसटी कर प्रणाली में 1.5 डेढ़ लाख तक टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए कार्य करने की सुविधा मिलनी चाहिए तभी जीएसटी कर प्रणाली सफल होगी ।यह सर्वविदित व यथार्थ सत्य है कि भारत वर्ष में बिजली /सर्वर/ नेटवर्क की गंभीर विकट समस्या है और बराबर दोनों फेल होते रहते हैं। जिससे समय से कार्य कर पाना संभव नहीं है तथा संबंधित लोग मानसिक आपातकाल जैसी स्थिति की अनुभूति कर रहे हैं।
4. यह की अधिकांशत: रिटर्न दाखिला में विलंब सरवर ,नेटवर्किंग ,पोर्टल की गड़बड़ी तथा सिस्टम के पटरी से उतर जाने के कारण होती है ।थोड़ी देरी कभी-कभी करदाता की तरफ से हो जाती है, जोकि स्वभाविक है। ऐसे में पहले तो लेट फीस जो वर्तमान समय में क्रमश: 50/- व 20/- है, लगानी नहीं चाहिए ।किंतु किसी भी दशा में लेट फीस की अधिकतम धनराशि 500/- से ऊपर कदापि नहीं होनी चाहिए। लेट फीस लेट फीस की तरह यानी रोकना होना चाहिए ना कि असह्य होनी चाहिए
जो कि देखने में ही उचित प्रतीत नहीं होता है ।अतः अधिकतम लेट फीस की धनराशि 500/-तक की होनी चाहिए। उससे कदापि अधिक नहीं होना चाहिए। तत्काल संशोधित वांछित है।
5. यह की इ वे बिल की अनिवार्यता को बढ़ती महंगाई को देखते हुए इसे कम से कम 5 लाख के ऊपर के माल पर अनिवार्य किया जाना चाहिए तथा 50 किलोमीटर की सीमा को जिला के बाहर जाने पर अनिवार्य किया जाना चाहिए।
6. यह की नोटिस की प्रक्रिया ई-मेल एवं मैनुअल दोनों विधि द्वारा की जानी चाहिए।
7. यह की दाखिल जीएसटीआर 1, जीएसटी आर 3बी में त्रुटि के सुधार के लिए संशोधन का प्राविधान तत्काल लाया जाना आवश्यक है।
8. यह कि जिन व्यापारियों ने समाधान योजना अपनाकर जीएसटी में अपना नया पंजीयन माह सितंबर 2017 में कराया था उन लोगों के पोर्टल ना खुलने के कारण अपना सितंबर का जी एस टी आर 4 नहीं भर सके ।अब लेट फीस के साथ माह सितंबर 2017 का जीएसटीआर 4 का पोर्टल खोल दिया है जो कि विधि विरुद्ध है ।अतः माह सितंबर 2017 जीएसटीआर 4 पर लेट फीस समाप्त होनी चाहिए और समाधान व्यापारियों को बिना लेट फीस के जीएसटीआर 4 माह सितंबर 2017 दाखिल करने का प्रावधान होना चाहिए।

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