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एक हफ्ते में किसानों को नहीं मिली राहत, तो आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेगी कांग्रेस-MIRZAPUR

हाल के दिनों में मिर्जापुर जनपद में आग लगने से सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल जलकर खाक हो गई. यह महज फसल नहीं जली है बल्कि किसानों की पूंजी जली है. हमने देश भर में देखा है कि बीमा कंपनियां फसल बीमा के नाम पर हजारों करोड़ का मुनाफा कमा रही हैं. जबकि इसका नाम मात्र भी लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा है. अगर प्रशासन एक हफ्ते के भीतर किसानों को उचित मुआवजा, अगली फसल का खर्च वहन करने और उनका केसीसी ऋण माफ करने की व्यवस्था नही करता है, तो कांग्रेस पार्टी को आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा. ये हमारी प्रशासन से अपील भी है और चेतावनी भी ललितेशपति त्रिपाठी ने यह बातें नारायणपुर ब्लॉक के विभिन्न गांवों में जनसंपर्क अभियान के तहत कहीं.
गौरतलब है कि हाल ही में चुनार थाना क्षेत्र के सुकुलपुर गांव, जमालपुर न्यायपंचायत डोमरी, केशवपुर व रेवड़ी गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में लगी आग में सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई. ग्रामीणों की सूचना के घंटों बाद भी फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर नहीं पहुंच सकी. प्रशासन के ढुल-मुल रवैये का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है. इसके साथ ही ललितेशपति त्रिपाठी ने कहा कि किसानों के बैंक खातों से फसल बीमा का पैसा कट तो जाता है. लेकिन यह पैसा किन बीमा कंपनियों की जेब में जा रहा है यह किसी को नहीं पता. बीमा कंपनी का एक भी दफ्तर जिले में नहीं है, जहां किसान अपनी क्षति और मुआवजे का दावा कर सके. कभी बैंक, प्रशासन की तरफ दौड़ाता है तो कभी प्रशासन बैंक की तरफ. पहले से ही फसल के नुकसान की मार झेल रहा किसान दौड़-धूप में ही हतोत्साहित हो जाता है. ललितेशपति त्रिपाठी ने कहा कि मेरे परदादा स्वर्गीय पंडित कमलापति त्रिपाठी के समय चलाई गई सिंचाई की परियोजना आज भी चुनार को सींचती है. लेकिन राज्य में कांग्रेस सरकार के बाद किसी भी बीजेपी, सपा, बसपा किसी भी सरकार ने नई परियोजना तो दूर पुरानी परियोजनाओं का रख-रखाव भी वाजिब नहीं समझा.

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