समाचारवंचितो की आवाज बनकर दूर तक चलना सिखाया खुद चलकर-MIRZAPUR

वंचितो की आवाज बनकर दूर तक चलना सिखाया खुद चलकर-MIRZAPUR

भागवत पाल की पुण्यतिथि पर विशेष*

जय सिंह पाल ने बताया की कहते है कि महान व्यक्तित्व हालातो की ऑच मे तपकर महान बनते है । संघर्षो का बीडा उठाकर चलने वाले समाज मे नया कीर्तिमान स्थापित कर आने वाली पीढियो को सच्ची प्रेरणा प्रदान करते रहते है। देश की आजादी के बाद तो घोर जातिवाद के चंगुल मे फंसे हिन्दुस्तान का दबा–कुचला तबका कराह रहा था । उन्हे सियासत की मुख्यधारा मे आने का हक संविधान के पन्नो तक ही सीमित था व्यवहार मे उन्हे हेय दृष्टि से देखा जाता था वंचितो के लिए मुख्यधारा की राजनीति मे आना बडा दुश्कर कार्य समझा जा रहा था उसमे शामिल होने के लिए कोई सपना तो देख सकता था लेकिन हिम्मत जुटाना मुश्किल था।

ऐसे दौर मे उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद के के मझवा विकासखंड के केवटाबीर गांव मे शंभूनाथ पाल और सुखदेवी के आंगन मे एक बालक का जन्म हुआ। घरवालो ने नाम रखा भागवत ।

भागवत बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । समाज मे उॅच नीच की बढती खाई के बीच भागवत पाल ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय मे पूरी की । समाज मे विसंगतियो की भरमार देख उनका मन आहत था जिसे दूर करने की हसरत प्रारम्भ से ही मन मे बनी हुई थी इसलिए वह उच्च शिक्षा के लिए काशी विद्यापीठ मे प्रवेश लिया वह जानत थे कि समाज की इस बुराई को दूर करने के लिए राजनीति करना जरूरी है इसलिए वह काशी विद्यापीठ मे ही छात्र राजनीति करना प्रारम्भ कर दिया। अपनी बहुमुखी प्रतिभा और राजनीतिक कुशलता के दम पर वह छात्र संगठन मे मंत्री बनाये गये अब राजनीति की ककहरा सीखने का दौर प्रारम्भ हो गया था और उनका हौसला और अनुभव दोनो मे इजाफा होने लगा था। उस समय राजनीति की मुख्यधारा से जुडने के लिए वह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से मंझवा विधानसभा के टिकट मांगने के लिए गये लेकिन जातिवाद की तासीर ने भागवत पाल को फिर से निराश किया उन्हे अपमानित कर टिकट देने से इंकार कर दिया गया लेकिन उन्होने हौसला नही खोया क्योकि संकल्प की मजबूत दीवार उन्होने विचारो की मिट्टी से सानकर बनाई थी।

उसी समय भागवत पाल की बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक काशीराम जी से मुलाकात हुई । काशीराम भागवत पाल की कार्यशैली और उनकी विचारधारा से काफी प्रभावित हुए और उन्हे चुनाव लडने का टिकट दिया लेकिन अभी उनकी कठिनाई की परीक्षा समाप्त नही हुई थी वह महज 54 वोटो से चुनाव हार गये। ऐसे हालात मे भी उन्होने धीरज नही खोया और संघर्ष के पथ पर चलने की ठानी सन् 1991 मे वह फिर से चुनाव लडे इस बार वह मंझवा से विधायक बनकर विधानसभा पहुंच चुके थे । उनकी हुंकार और लोगो को प्रभावित करने की ताकत से काशीराम ने उन्हे प्रदेश महासचिव बना दिया। मझवा विधानसभा में एक दलित के साथ हुए पुलिसिया अत्याचार के खिलाफ जेल भरो आंदोलन किया 586 लोगों के साथ 7 दिन तक मिर्जापुर जिला कारागार में राजनीतिक बंदी रहे राजनीतिक उठापटक के बीच 1993 मे फिर से मध्यावधि चुनाव हुए जिसमे जनता ने इन्हे फिर से अपने आंखो का तारा बनाकर विधानसभा भेजा । उस समय राजनीतिक घटनाक्रम मे बसपा का सपा के साथ गठबंधन टूट गया और भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर बसपा ने सूबे मे सरकार बनाई। 27 जून 1995 का वह ऐतिहासिक दिन था जब भागवत पाल ने मायावती मंत्रिमंडल मे शामिल होकर राज्यमंत्री के रूप मे शपथ लिया यह महज शपथ नही था इस बात की मुनादी थी कि संघर्षो के साये मे भी रहकर बडा से बडा मुकाम हासिल किया जा सकता है।

उन्हे प्रदेश मे उत्तराखण्ड विकास के साथ साथ दुग्ध विकास विभाग की जिम्मेदारी मिली लेकिन तीन माह बाद फिर से सरकार गिर गई लेकिन भागवत पाल का राजनैतिक कद बढ गया काशीराम ने इन्हे 31अक्टुबर 1996 को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। काशीराम की मंशा थी कि इन्हे विधानपरिषद भेज कर इनसे सेवा ली जाय लेकिन मायावती की जिद के सामने वह हार गये और काशीराम के मना करने के बावजूद वह मजमा विधानसभा से नामांकन किया लेकिन वह चुनाव हार गये । उस समय प्रदेश मे किसी भी दल को बहुमत नही मिला था’ मुलायम सिंह के संदेशवाहक बनकर वह मायावती से मिले और मुलायम सिंह का संदेश कहा कि अगर मायावती खुद मुख्यमंत्री न बने तो वह समर्थन कर सकते है। बस यही वह घटना थी जहां से साजिश और सियासत ने मिलकर भागवत पाल और पाल समाज के नेतृत्व की धार को कुन्द करने का काम किया। मायावती को अंदेशा हुआ कि भागवत पाल खुद मुंख्यमंत्री बनना चाहते है इसलिए मायावती भागवत जी से नफरत करने लगी। 1997 मे बीजेपी और बसपा की मिलीजुली सरकार बनी । भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के मंत्री बनने और भागवत जी से भेदभाव करने पर मीडिया बंधुओ ने जब मंत्री न बनाये जाने पर भागवत से सवाल दागा तो उन्होने कहा कि मंत्री तो महज विभाग देखता है और प्रदेश अध्यक्ष पूरा प्रदेश देखता है बस यही बात मायावती को नागवार गुजरी और काशीराम को बिना किसी सूचना के छल करते हुए भागवत पाल को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया। काशीराम ने उस समय भागवत जी को राष्ट्रीय सचिव बना दिया जिसे लेकर मायावती चिढ गई और लखनउ स्थित उनके सरकारी आवास से उनका सामान फेंककर अपनी नाराजगी जाहिर किया। लेकिन एक स्वाभिमानी व्यक्तित्व को कहां तक यह अपमान बर्दाश्त होता वह 10 अक्टूबर 1997 को पिछडा समाज पार्टी का गठन कर लिया। सन 1998 के लोकसभा चुनाव के दौरान वह मुलायम सिंह के साथ हो गये और समाजवादी पार्टी मे प्रदेश उपाध्यक्ष बनाये गये। 2002 के विधानसभा चुनाव मे समाजवादी पार्टी ने मझवां विधानसभा से उन्हे टिकट दिया लेकिन वह चुनाव नही जीत सके । 12 सितम्बर 2004 को वह दुनिया को अलविदा कह दिया और अपने विचारपुंज को एक नई सीख के साथ छोड दिया।

भागवत पाल के विचार आज भी पिछडे समाज को नई प्रेरणा देते है। उनका अदम्य साहस और कुछ कर गुजरने की सीख आने वाली पीढियो को हमेशा सीख देती रहेगी। वह सिर्फ पाल समाज के नेता नही थे बल्कि जुल्म और ज्यादिती सहने वाले तबके के सच्चे मसीहा थे।

*अपमान पर भी नही डिगे थे भागवत पाल*

सामान्य रूप से किसी चीज की शुरूआत मे अपमान का घूट पीने के बाद लोग टूट जाते है और खुद और भगवान को कोसना शुरू कर हिम्मत हार जाते है लेकिन भागवत पाल ऐसे अडिग पुरूष थे जो रास्ते तो जरूर बदलते थे मगर उनकी मंजिल हमेशा उनके तय किये निर्णय पर जाकर रूकती थी। छात्र राजनीति से जुडने के बाद जब वह जनता दल के मुखिया के पास टिकट मांगने के लिए गये तो उन्हे यह कहकर अपमानित किया गया कि जिस समाज से वह आते है उस समाज के लोग कभी ग्राम पंचायत का चुनाव भी नही जीत पाये है तो विधानसभा कैसे जीत पायेगे । यह वही चौधरी चरण सिंह थे जो बाद मे देश के प्रधानमंत्री बने लेकिन देश की बागडोर अपने हाथो मे लेकर चलाने वाले उस प्रधानमंत्री को नही पता था कि भागवत पाल हर कोई नही होता है जब वह भागवत पाल से यह बात कह रहे थे उस समय उनके चेहरे पर मधुर मुस्कान थी क्योकि वह जानते थे कि उन्हे विधानसभा पहुंचने से कोई रोक नही पायेगा ।

भागवत पाल के चार पुत्र रत्न हुए जिन्होंने अपने पिता के विचारों को हमेशा आत्मसात किया। बड़े पुत्र भारत सिंह पाल प्रयागराज हाई कोर्ट में वकालत के माध्यम से समाजसेवा में लगे है। जय सिंह पाल मिर्जापुर सिविल कोर्ट में रहते हुए भारतीय जनता पार्टी जिला महामंत्री के रूप में अपनी सेवा दे रहे है। विजय सिंह पाल पेशे से व्यवसायी है उदय सिंह लोक निर्माण विभाग दिल्ली में कार्यरत है।

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