स्वास्थ्य विभाग द्वारा जहां एक तरफ घर-घर टीबी रोगी की खोज करते हुए उन्हें निशुल्क जांच एवं इलाज उपलब्ध कराने की सुविधा प्रदान करने की कार्रवाई एसीएफ योजना के माध्यम से की जा रही है। वही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पचेवरा, तहसील चुनार पर तैनात तत्कालीन प्रभारी डॉ द्वारा अपने पूर्व के तैनाती स्थान न्यू पीएचसी नरायनपुर पर अपने तैनाती के दौरान टीबी रोगी से ही ₹600 जबरन लेकर टीबी मरीज का इलाज किया जाना प्रारंभ किया गया था। जिसकी शिकायत मरीज द्वारा जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एल एस मिश्रा से की गई थी,जिसके उपरांत डॉक्टर मिश्रा एवं डिस्ट्रिक्ट पीपीएम कोऑर्डिनेटर सतीश शंकर यादव द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर टीबी मरीज के आरोप की जांच करना शुरू की गई तो वहीं स्वास्थ्य केंद्र पर अन्य कई मरीजों द्वारा भी जबरन पैसा लेकर इलाज की सुविधा दिए जाने की बात कही जाने लगी। टीम द्वारा शिकायतों की गंभीरता पूर्वक जांच कर शिकायत सही पाए जाने की दशा में समस्त मरीजों से लिए गए अवैध पैसे को डॉ से तत्काल मौके पर ही वापस कराने के साथ-साथ डॉक्टर के विषय में अपनी जांच आख्या लिखित रूप से जिले के आला अधिकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी के साथ साथ जिलाधिकारी को अवगत करा दिया गया। जिसके उपरांत डॉ के संदर्भ में प्राप्त जांच आख्या एवं तमाम मरीजों व अन्य विभागीय कर्मचारियों से लगातार मिल रही शिकायतों को जिला प्रशासन द्वारा मद्देनजर रखते हुए जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा डॉ के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को भी ठोस कार्रवाई हेतु अवगत कराया गया। जिसके उपरांत शासन द्वारा संज्ञान में आए अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए दिनांक 26 सितंबर 2019 को डॉ को जनहित में निलंबित करते हुए उन्हें अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विंध्याचल मंडल मिर्जापुर से संबद्ध कर दिया।