समाचारनवागत जिलाधिकारी ने आते ही किया पशु आश्रय स्थल का निरीक्षण-MIRZAPUR

नवागत जिलाधिकारी ने आते ही किया पशु आश्रय स्थल का निरीक्षण-MIRZAPUR

एक सप्ताह के अन्दर पूर्ण करायें गांवंश आश्रय स्थल का बाउड््रीवाल -जिलाधिकारी

न्वागत जिलाधिकारी ने किया गांेवंश आश्रय स्थल का निरीक्षण

पशुओं के पानी पीने के लिये रैम्पदार छोटे तालाब

मीरजापुर, 03 अक्टूबर, 2019- नवागत जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल ने अपना कार्यभार ग्रहण करने के दूसरे ही दिन डागमगपुर के पास ग्राम सभा सिधौरा में जाकर गोवंश पशु आश्रय स्थल का निरीक्षण किया तथा जनपद के अन्य गांवश आश्रय स्थलों के बारे में जानकारी लीं। सिंधौरा आश्रय स्थल विगत छः माह से बन रहे बाउड््रीवाल की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी मौके पर उपस्थित कान्टेक्टर को कडी फटकार लगाते हुये कहा कि बाउड््रवाल के निर्माण में बहुत काम अवशेष नहीं रह गया है, कार्य मे तेजी लाकर आगामी 10 नवम्बर तक पूर्ण कर फोटोग्राफी कर अवगत करायें। जिलाधिकारी ने अपर मुख्य अधिकारी को भी निर्देशित किया कि वे अपने देष-रेख में कार्य पूर्ण करायें। उन्होंने कहा कि उसके बाद यदि अपूर्ण पाया जाता है तो सम्बंधित के विरूद्ध कडी कार्यवाही की जायेगी। सिधौरा गोवंश आश्रय स्थल के मुख्य गेट से अन्दर जाने के लिये लगभग 22 मीटर का कच्चा रास्ता देख जिलाािकारी ने हिदायत दी कि यहा ंपर या तो खडण्जाया गिट्टी डालकर बनाया जाये ताकि बरसात के कीचड आदि न होने पाये। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल ने गौ पूजन भी किया तथा उसे गुड भी खिलाया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी श्री वाष्र्णेय के द्वारा बताया गया कि सिधौरा आश्रय स्थल में कुल 350 पशुओं के रखने की क्षमता है वर्तमान में 157 पशु आश्रय स्ािल में रखे गये हैं। पशुओं के पानी पीने के लिये तीन चरही तथा रहने व खाने के लिये चार शेड बनाये गये हैं। इसी स्थल पर भूषा रखने के लिये गोदाम भी बनाया गया तथा पानी पीने के लिये बोरिंग व बगल में डैम भी उपलब है। जिलाधिकारी ने सभी शेडों में जा-जाकर एक पशुाओं को देखा तथा उनके स्वास्थ्य व इलाज के बारे में जानकारी करने पर बताया गया कि गोवंश आश्रय स्थल में उपयोगी दवाइयों को रखा गया है तथा सम्बंधित क्षेत्र के चिकित्सक के द्वारा प्रति दिन पशुओं के स्वास्थ्य का परीक्षण किया जाता है। उन्होंने बताया कि एक पशुओं को बुखार तथा एक के पैर में चोट लगी हैं जिसका इलाज किया जा रहा है। जिलाधिकारी द्वारा आश्रय स्थल के परिसर का निरीक्षण किया गया नीचे की तरफ छोटे-छोटे गड्ढे देख कहा कि इन गड्डों में रैम्प के आकार का एक या दो फिट गहरा तालाब का आकार देकर पानी इकट्ठा किया जाय ताकि किसी भी समय पशु वहां जाकर पानी पी सके। उन्होंने कहा कि बाउ्ड्ीवाल पूर्ण होने के बाद पशुओं को परिसर चरने के लिये भी छोडा जाये। जिलाधिकारी ने कहा कि पशुओं के गोबर के द्वारा या तो बायोगैस बनाने के कार्य या तो कम्पोस्ट खाद बनाकर किसानों में विक्रय जाये ताकि उसके आमदनी से आश्रय स्थलों को और विकसित किया जा सके। इस दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया बगल के टाण्डाफाल में स्थित गौवंश आश्रय स्थल में वर्तमान में कुल 451 पशु हैं।

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