बच्चे देश का भविष्य- किशोर न्याय समिति

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मीरजापुर में 26.3.2021/आज एन0आई0सी0 कलेक्ट्रेट में किशोर न्याय समिति उत्तर प्रदेश द्वारा वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की गयी। जिसमे किशोरो के विविध आयामों पर विधिवत प्रकाश डाला गया। मीरजापुर जनपद के सभी थानो मे विशेष किशोर पुलिस सिपाही के अन्तर्गत बाल कल्याण पुलिस अधिकारी नामित है। जो जे0जे0 एक्ट 2015 पाक्सो एक्ट 2012 पर प्रशिक्षित है। विधि विवादित किशोर अपचारियो के मामलो की सुनवाई के लिये जनपद मे किशोर न्याय बोर्ड सक्रिय है, देखभाल और संरक्षण से सम्बन्धित बाल बालिकाओ के मामलो की सुनवाई तथा अन्य आवश्यक कार्यवाहियो हेतु जनपद मे बाल कल्याण समिति क्रिया शील है। बाल संरक्षण से सम्बन्धित मुयमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बी0बी0बी0पी0, प्रयोजकता, फास्ट केयर इत्यादि सम्बन्धी बिन्दुओ पर समीक्षा की गयी।जनपद के सभी 12 विकास खण्ड मे ब्लाक स्तरीय बाल संरक्षण समिति गठित हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की पहल पर मिशन शक्ति के अन्तर्गत सभी 12 विकास खण्ड एवं सभी 809 ग्राम पंचायतो मे बैंठके कराते हुये बालिका सुरक्षा, महिला सुरक्षा, चाइल्ड हेल्प लाइन इत्यादि की जानकारी/जागरूकता का कार्यक्रम कराया जा रहा हैं। राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर), मोर्चाघर, मीरजापुर मे विन्घ्याचल मण्डल की तीनो जनपदो मीरजापुर, भदोही, सोनभद्र के अपचारी किशोर संरक्षित रहते हैं। यहाॅ करीब 88 से 89 किशोर सदैव रहते है। शिक्षण हेतु 02 शिक्षक सम्बद्ध है। वर्ष 2020-21 मे गृह 08 किशोर कक्षा 10 तथा 05 किशोर कक्षा 12 की वार्षिक परीक्षा शामिल करेगें। जोखिमग्रस्त बालको/बालिकाओ की खोज करके उन्हे सुरक्षित स्थान(आशा सदन नामक गृह) पर रखकर इनकी दवाई, रहने की सुविधा, भोजन, शिक्षा, मनोरंजन इत्यादि संतोषजनक व्यवस्था गैर सरकारी संस्था आशा सदन के माध्यम से दी जा रही हैं। जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा कूड़ा बीनने वाले बच्चो को उनकी शिक्षा के प्रति विद्यमान रूझान के दृष्टिगत चिन्हाकन किया गया। इनमे से 05 बच्चे जो कि अनाथ है कोेे ैचवदेवतेीपच कार्यक्रम संे जोड़ा गया है। जनपद मीरजापुर मे परित्यक्त नवजात शिशुओ/परिरक्षण का कार्य पूर्ण गम्भीरता से किया जाता है। ऐसे लावारिस बच्चो का इलाज जिला बाल संरक्षण ईकाई /चाइल्ड लाइन द्वारा जिला चिकित्सालय मे कराया जाता है तथा स्वस्थ होने पर जनपद सोनभद्र के सर्वोदय शिशु गृह भेजा जाता है। जनपद मे राजकीय सम्प्रेक्षण गृह मे 30 बच्चो के सापेक्ष औसतन 85 बच्चे आवासित है। जनपद में एक सम्प्रेक्षण गृह बनना प्रस्तावित है, इससे कानून का उल्लघन करने वाले बच्चो को आवासित करने मे बहुत ही मद्दगार होगा। एक अन्य सुझाव के रूप मे यदि मण्डल के किसी जनपद मे सम्प्रेक्षण गृह संचालित किया जाये तो मीरजापुर जनपद मे संस्था मे आवासित बच्चो को आवासित करने मे परेशानी नही होगी एवं सोनभद्र से इतनी दूर बच्चो को लाने मे जो समस्या आती है, उसका भी निदान हो जायेगा। 04 बच्चो के दत्तक ग्रहण हेतु कुछ परिवार न्यायालय मे लम्बित है। जिस पर त्वरित कार्यवाही का आश्वासन दिया गया। समिति के न्यायाधीश ने बच्चो की शिक्षा एवं मांनसिक एवं शरीरिक स्वास्थ, एवं काउसंलर के साथ साथ स्पोर्टस एवं सांस्कृतिक गतिविधियो के विकास पर बल दिया। समाजिक सस्थाओ से कहा कि बच्चो की आवश्यकता एवं केयर के प्रति आप सभी संवेदनशील बने केवल कागजो पर तथ्य आ जाने से ही नही अपितु धरातल भी पर बच्चो का विकास नजर आना चाहिये। बच्चो के समग्र विकास हेतु एवं अवसंरचना एवं आवश्यकता वस्तुओ हेतु कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलटी के तहत कम्पनियो को सहभागिता करना चाहिये।बच्चे देश का भविष्य है हमे इनके लिये जागरूक एवं संवदेनशील होना चाहियें। जिससे इनका व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास और जीवन खुशहाल हो सके। प्रसारण मे अपर जिलाधिकारी यू0पी0 सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी, सी0डब्लू0सी0 चेयरमैन, जिला बाल संरक्षण इकाई, महिला कल्याण अधिकारी, वन स्टाफ सखी एवं सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहें।

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