स्कूल संचालक तीन साल बाद 10 फीसद ही फीस बढ़ा सकते हैं,

निजी स्कूल संचालकों का नहीं चलेगी मनमानी

जौनपुर। शासन ने गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूल संचालकों द्वारा अभिभावकों पर फीस, कापी-किताब आदि के नाम पर आर्थिक शोषण किए जाने को गंभीरता से लिया है। शिक्षा निदेशक बेसिक अजय कुमार सिह ने सभी जिलाधिकारियों को इसके लिए पत्र लिखा है। उन्होंने एडीएम या सीडीओ की अध्यक्षता व बीएसए, जिला विद्यालय निरीक्षक व डायट प्राचार्य की मौजूदगी में तत्काल बैठक करने का अनुरोध किया है। इस बैठक में स्कूल संचालक व अभिभावक भी मौजूद रहेंगे। जिले में परिषदीय व सहायता प्राप्त स्कूल के अलावा अशासकीय गैर सहायता प्राप्त स्कूल संचालित हैं, जिन्हें विभिन्न बोर्डों से मान्यता है। बावजूद इसके संबंधित बोर्ड द्वारा मान्यता प्रदत्त करते समय लागू की गई शर्तों का इन विद्यालयों द्वारा अनुपालन नहीं कराया जा रहा है। विभिन्न स्त्रोतों से शासन को यह शिकायतें मिल रही हैं कि निजी स्कूल संचालकों द्वारा मनमाने तरीके से फीस में अत्यधिक वृद्धि की गई है। इसके अलावा यूनीफार्म, पाठ्य-पुस्तकें का क्रय स्कूल द्वारा नामित दुकान से करने के लिए छात्रों व अभिभावकों को विवश किया जा रहा है, जिससे जनमानस में गुस्सा है। शिक्षा निदेशक ने कहा है कि इसके निस्तारण के लिए पहल की जरूरत है। उन्होंनेे जिलाधिकारियों से अनुरोध किया है कि मुख्य विकास अधिकारी या अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में तत्काल बैठक आयोजित कराने के लिए निर्देशित करें। जिसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, डायट प्राचार्य समेत निजी स्कूलों के प्रबंधतंत्र व अभिभावकों को भी आमंत्रित किया जाए। प्रयास करें कि यह बैठक नियमित रूप से आयोजित होती रहे, ताकि समस्याओं का निवारण समय से हो सके। ज्ञात हो कि शासनादेश है कि निजी स्कूल संचालक तीन साल बाद 10 फीसद ही फीस बढ़ा सकते हैं, लेकिन अधिकतर स्कूल संचालक इस आदेश को ठेंगा दिखा रहे हैं। स्कूल संचालकों ने हर साल फीस बढ़ोत्तरी की है।

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