जहरीली चाय पीने से दो दर्जन से अधिक बिमार-MIRZAPUR

मिर्जापुर (अहरौरा) ।सुबह उठते ही चाय पीने की तलब लग जाती है। क्या बूढ़े क्या बच्चे क्या जवान सभी सुबह चाय की दुकान पर आकर समाचारपत्र पढ़ते हैं और चाय की चुस्की से दिन की शुरुआत करते हैं। अहरौरा बाईपास चित्तविश्राम क्षेत्र में सड़क के किनारे एक चाय की गुमती है। यहां की चाय पीने के लिए सुबह सैकड़ों लोग जमा हो जाते हैं। वाराणसी – शक्ति नगर हाईवे पर दुकान होने के कारण कुछ गाड़ियां भी चाय पीने के लिए रूकती है।चाय पीने के बाद लोग अपने कार्य करने के लिए अपने घरों की जाने लगे। चाय पीने ही लोगों को भारीपन लगने लगा परन्तु किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया कि यह चाय पीने के कारण हो रहा है। दुकानदार ने भी चाय पी थी। आधे घंटे के बाद लोग अचानक से ही बेहोश होने लगे, किसी को नशा छाने लगा तो कोई हाथ पैर में शून्यता महसूस करने लगा और उसकी आँखों में तस्वीर हिलती डुलती नजर आने लगी। कुछ की हालत दुकान पर ही खराब हो गई थी सो वहां अफरातफरी का माहौल हो गया। समाजसेवी, जन सेवा भाव वाले व्यक्तियों ने बिना समय गवाये गिरते पड़ते लोगों को, बेहोश पड़े लोगों को और चाय पीकर सामान्य बैठे लोगों को बाईकों से अहरौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचाना क्या शुरू किया कि नौ बजे से बिमार व्यक्तियों का आना एक बजे दोपहर तक चलती रही। धीरे धीरे यह संख्या दो दर्जन के पार जा पहुंची। इनमें से दो व्यक्तियों की हालत जिन्दगी और मौत के बीच की थी जिन्हें ट्रामा सेंटर वाराणसी रेफर कर दिया गया। अहरौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में बेड कम पड़ गये। मरीजों का जमीन में ही ईलाज शुरू कर दिया गया। आज सात डॉक्टरों में से मात्र दो ही उपस्थित थे जो समय रहते मोर्चा संभालते हुए ईलाज शुरू कर दिया। शेष डाक्टरों को सूचित कर बुलाया जा रहा था। सी एम ओ मिर्जापुर ने टेलीफोनिक वार्ता में कहा कि इस संबंध में तुरंत उचित कार्रवाई करता हूँ। अहरौरा पुलिस मौके पर पहुंची और दुकान में सामानों की जांच शुरू कर दी। पुलिस सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पहुंच कर सामान्य हो रहे मरीजों से पूछताछ करते हुए आगे की उचित कार्रवाई में जुट गयी थी। अभी तक अस्पताल कर्मचारियों ने मरीजों पर पैनी निगाह रखते हुए स्थिति को नियंत्रित कर रखा था लेकिन अस्पताल की सफाई व्यवस्था, बेड की समस्या, डाक्टरों की अनुपस्थिति और संचालन व्यवस्था की खामियां एक बार फिर उजागर हो गई। पुलिस शांति व्यवस्था बनाये रखने में तथा बिमार व्यक्तियों के परिजनों को तथा अस्पताल में मची आपाधापी को नियंत्रित करने में कोशिश करती रही। सूत्रों के मुताबिक ग्राम प्रधान महुली रणजीत यादव व राजू सिंह व इनके सहयोगी बार बार मरीजों को अस्पताल पहुचा रहे थे।
चाय आखिरकार जहरीली क्यों हुई इसकी कोई पुख्ता रिपोर्ट अभी तक नहीं आयी थी लेकिन जिस दूध से चाय बनाया गया था वह दूध ही जहरीली थी, इसलिए फूड प्वाइजिंग हुई थी। इसी को आधार मानकर विवेचना की जा रही है। पहली बात गाय या भैस दूहते समय अधिक दूध निकालने के लिए उसे सूई लगा देते हैं। दूसरी बात रात को दूहने के बाद अगर दूध सुबह बेचना है तो एक दवा उसमें डाल देते हैं जिससे दूध खराब न हो। तीसरी बात एक बल्टे में तीस से पच्चास लीटर तक दूध आता है जो अक्सर कई गायों का, कई भैसों का, कई भेड़ बकरियों का दूध मिलाकर होता है जिसमें रात का रखा दूध भी होता है। इससे भी कभी कभी प्वाइजिंग होने की संभावना बनी रहती है। इसी कारण फुड इंस्पेक्टर विजय प्रताप सिंह मिर्जापुर से तुरंत मौके पर घटनास्थल पर पहुंचकर अन्य चाय विक्रेताओं की सैम्पलिंग कर दी है। जिससे अन्य चाय व खाद्य पदार्थ विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है।
अहरौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लाये गये व्यक्तियों की सूची
बाल कुमार पुत्र कन्हैया मानिकपुर, फूलचन्द पुत्र राम अधार निवासी चित्त विश्राम, शम्भू मौर्या पुत्र बुद्धु मल्लाही टोला, लाल व्रत सिंह पुत्र रामअसीष निवासी चित्तविश्राम, जमुना पुत्र दयाराम निवासी अहरौरा डीह, लाल चन्द्र निवासी विन्दपुरवां, शिवम व विशाल पुत्रगण चन्दन अहरौरा बाजार, सगीर, रामशकल, रामचरन, काशी, श्याम, हजारी, रिंकू, रामसूरत आदि थे।

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