पुरे देश में सर्वर व् नेटवर्क की समस्या – मथुरा प्रसाद मैनी

आयकर व्यापारकर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मथुरा प्रसाद मैनी एडवोकेट की अध्यक्षता में वाणिज्यकर कार्यालय में बैठक कर वित्त मंत्री अरुण जेटली को समाधान योजना की अवधि बढ़ाये जाने हेतु यह विचार व्यक्त किया गया की जो करदाता अभी तक समाधान योजना नही अपना सके है किन्तु समाधान योजना का विकल्प स्वीकार करके व्यवसाय करना चाहते है ,उन सभी करदाताओं को 30 सितम्बर 2017 तक एक मौका दिया जाय ,जैसा की सर्वविदित है प्रदेश में ही नहीं पुरे देश में सर्वर व् नेटवर्क की समस्या बराबर बनी रहती है जिससे कार्य बाधित होता है । एकाएक व्यापारी के ऊपर इतना ज्यादा विधिक कार्यवाही करने की बाध्यता कर दी गई है की वह समय से विधिक कार्यवाही नही कर पा रहा है ।इसलिए सभी करदाताओं को समाधान योजना का विकल्प स्वीकार करने के लिए एक मौक़ा और दिया जाना न्याय व जनहित में है ।जैसा की अभी जी.एस. टी.अधिनियम के अंतर्गत माइगरेशन करने की अंतिम तिथि 30.09.2017 है।अतः इसके पूर्व किसी भी विधिक कार्यवाही का लाभ पाने से करदाताओं को वंछित करना विधि सम्मत नही है ।समाधान योजना अपनाने वाले व्यापारी को केवल तिमाही नक्शा दाखिल करने का दायित्व होता है उनके लिए GSTR,1,2,3,दाखिल करने की बाध्यता नही है ।उन्हें केवल अपने बिक्री का तिमाही रिटर्न 20.10.2017 तक करना है ।ऐसे करदाता जो समाधान योजना का विकल्प स्वीकार नही कर सके है ,उन्हें एक मौका और मिल जाता तो करदाता को बड़ी राहत होगी व विभाग को भी कोई क्षति नही होगी ।वर्तमान सरकार नया नया कर कानून होने के कारण बराबर हर स्टेज पर जनहित में सुरक्षा प्रदान कर रही है तथा कर में छूट एवम् कमी कर रही है ।ऐसे में ये जनहित में न्यायहित होगा की उन्हें एक मौक़ा समाधान योजना स्वीकार करने के लिए दिया जाय।जिससे वे अपना काम सुचारू रूप से कर सकें ।इतने बड़े भारत में और प्रत्येक कार्य नेट द्वारा होने के कारण बराबर कुछ न कुछ परेशानी बनी रहती है ।अतः नियम के अंतर्गत समाधान योजना प्रार्थनापत्र स्वीकार करने के लिए दाखिल की तिथि 25.07.2017 से 16.08 2017 तक की अवधि कम रही हऐ ।जिसको भी ध्यान में रखते हुए मांग एवम् स्वीकार योग्य है ।
यहाँ यह तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण एवम् विचारणीय है की जब GSTR 1,2,3,3B दाखिल करने के लिये शासन द्वारा अतिरिक्त समय दिया गया तब समाधान योजना अपनाने वाले व्यापारियों को भी एक मौक़ा दिया जाना विधि सम्मत है ।जबकि नियमित करदाता माल की खरीद व् पूंजीगत माल की खरीद वः दिए गए कर को बतौर ITC लाभ लेते है ।तथा बिक्री पर बनने वाले कर में समायोजित करते है ।शासन द्वारा नियमित करदाता को GSTR 1,2,3,3B की कार्यवाही करने में अतिरिक्त समय देकर तिथि बढ़ाई गयी ।ऐसे व्यापारी जो समाधान योजना का विकल्प स्वीकार करते है ,वः व्यापारी खरीद पर दिए गए कर का लाभ बतौर ITC नही लेते है ।बल्कि वह कर की धनराशि सरकार के खाते में चली जाती है ।साथ ही ऐसे व्यापारी अपनी घोषि बिक्री पर 1% या 2% की दर से स्वीक्रत कर अदा करते है ।ऐसे करदाता जो समाधान योजना का विकल्प स्वीकार नही कर सका है और समाधान का विकल्प स्वीकार करना चाहते है ।उन्हें न्याय हित में इसके लिए समय दिया जाना आवश्यक है ।

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