संत मोरारी बापू के द्वारा रामकथा – विंध्य क्षेत्र के कालीखोह मार्ग

मिर्ज़ापुर–नवरात्र के पावन बेला पर दूरदराज से आये व् स्थानीय भक्तगणों को इस बार जगतजननी माँ विंध्यवासिनी, कालीखोह , व अष्टभुजी देवी के त्रिकोण के पश्चात भगवान राम की कथा का श्रवण करने की विशेष व्यवस्था कराई गई है ।भव्य तैयारी के साथ कार्यक्रम की दिव्यता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि एक बड़ा विशाल वाटरप्रूफ पंडाल का निर्माण कराया गया है ।जिसमे एक साथ 10000 लोग बैठ सके । प्रकाट्य विद्वान संत मोरारी बापू के द्वारा रामकथा सुननें का ऐतिहासिक व अविस्मरणीय मौक़ा मिलने जा रहा है ।नवरात्र के दौरान विंध्य क्षेत्र के कालीखोह मार्ग के मोड़ पर स्थित कार्यक्रम की शुरुवात दिनांक 21 सितम्बर को सायं काल 4 बजे से होगी ।उसके बाद निरन्तर प्रतिदिन 22 से 29 सितम्बर 2017 तक प्रातः 9.30 से कथा प्रारम्भ हो जायेगी ।
पत्रकार वार्ता के दौरान K.K.जालान ने बताया की कथा के पश्चात आये हुए समस्त श्रधालुओं व भक्तों के लिए प्रसाद की व्यवस्था भी की गई है साथ ही साथ गाडी पार्किग के लिए भी उम्दा व्यवस्था रक्खा गया है ।K.K.जालान ने बताया की मोरारी बापू से हम सब कई वर्षों से इस प्रयास में लगे रहे की मोरारी बापू के द्वारा क्षेत्र के वासियों के लिए कथा का कार्यक्रम बने और हम लोगों को अपार हर्ष के साथ पिछले एक हफ्ते में जानकारी प्राप्त हुई की विंध्याचल में बापू के कार्यक्रम के लिए समय मिल गया है ।कम समय में इतनी व्यापक तैयारी माँ विंध्यवासिनी के आशीर्वाद से भक्तों के सहयोग से व नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा के साथ से सम्भव हो पा रहा है ।बताया गया की रत्नाकर मिश्रा ने 8 वर्ष पूर्व मोरारी बापू से विंध्याचल आने का विनम्र निवेदन किया था और बापू ने उसे स्वीकार कर लिया ।जिससे समूचा मिर्ज़ापुर हर्षित और गौरवांवित महसूस कर रहा है ।रत्नाकर मिश्रा ने बताया की विंध्य जैसा पावन पवित्र क्षेत्र सम्पूर्ण ब्रहमांड में नही है और सुखद संयोग है की नवरात्र में दूरदराज से आये भक्तगण यंहा रामकथा के ज्ञान में डुबकी लगायेगें और प्रसाद ग्रहण कर धन्य महसूस करेंगें ।एक सवाल के जवाब में K.K.जालान ने बताया की हम और हमारे सहयोगियों का परम् सौभाग्य है की ऐसे कार्यक्रम में हमलोग सम्मिलित होते है और पूण्य के भागीदार बनते है ।जानकारी के मुताबिक प्रथम दिन मोरारी बापू विंध्याचल मन्दिर में दर्शन करेंगें और उनके निवास करने का स्थान सिद्धपीठ को इसलिए चयन किया गया क्योंकि मोरारी बापू का गंगाजल से गहरा लगाव है ।गंगाजल पीना ,गंगाजल से बनी चाय पीना व उनके भोजन आदि में भी जिस जल का इस्तेमाल होता है वह गंगाजल ही होता है ।लिहाजा गंगा के सन्निकट व विंध्य पर्वत के तलहटी पर कार्यक्रम स्थल होना सभी के लिए सुखद अनुभव व स्नेहपूर्ण आशीर्वाद जैसे लाभ की प्राप्ति का साक्षात्कार सम्भव प्रतीत होता है ।

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