समाचारजब जीवन है तभी सारे कर्मों का निर्धारण होता है- मिर्जापुर

जब जीवन है तभी सारे कर्मों का निर्धारण होता है- मिर्जापुर

गुरु ही भगवान है या कथन विकासखंड सिटी के हनुमान मंदिर पर स्वामी नारायण आनंद तीर्थ जीने 5 दिन कथा के पहले दिन कहा महाराज जी ने कहा कि जिस प्रकार से दर्पण में चेहरा दिखाई देता है उसी प्रकार से गुरु के स्वरूप में भगवान दिखाई देने लगते हैं गुरु से जब अनुराग प्रेम होता है तो गुरु ज्ञान की दृष्टि भक्तों में डालता है बहिर्मुखी अंतर्मुखी और शिष्य का मन मुड़ कर आत्म दर्शन करने लगता है,प्रेम में आलस्य नही होता है, गुरु ही अनुराग है गुरु ही प्रेम है गुरु ही आकाश है गुरु ही पाताल है गुरु ही धरती है गुरु ही मां है गुरु ही पिता है गर्भ को धारण करने वाली शक्ति गुरु ही है गुरु शब्द को आत्मा से प्रकाशित किया गया है आत्मा है तो मनुष्य का जीवन है और जब जीवन है तभी सारे कर्मों का निर्धारण होता है कथा के दौरान बीच-बीच में संगीतमय भजन भजन भी चल रहा था जिसको सुनकर उपस्थित जन्मा है लोग आनंदित हो रहे थे और बीच-बीच में गुरु का जयकारा लगा रहे थे इस अवसर पर हरिश्चन्द्र शुक्ला नागेंद्र दुबे बंसी शुक्ला मुरलीधर दुबे जामुन दुबे राजेंद्र प्रसाद दुबे पुजारी अमरेश चंद्र भैरव प्रसाद राम जी मनीष पांडे देवमणि शुक्ला सुमन देवी आदि लोग काफी संख्या में उपस्थित रहे

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