समाचारजेल 118 साल पुरानी होने के कारण सभी बैरकें दयनीय अवस्था में-MIRZAPUR

जेल 118 साल पुरानी होने के कारण सभी बैरकें दयनीय अवस्था में-MIRZAPUR

मिर्जापुर उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति लखनऊ के चेयरमैन डॉ उमेश शर्मा के निर्देश निर्देशाअनुसार में संजय श्रीवास्तव जोन सचिव /जेल पर्यवेक्षक वह मयंक सिंह सहायक जोन सचिव जेल पर्यवेक्षक पूर्वी उत्तर प्रदेश और समिति के सदस्यों द्वारा जेल का निरीक्षण किया गया 3 घंटे के निरीक्षण के उपरांत कुछ चीजों को छोड़कर सभी चीजें सामान्य पाई गई जेल में कैदियों की संख्या 332 के सापेक्ष 747 है जिसमें महिला कैदी 77 तथा बच्चों की संख्या 14 है जेल के अंदर 30 सीसीटीवी कैमरा लगा है जो पूरी तरह से वर्किंग में है जेल में मोबाइल का प्रयोग कोई कैदी ना कर सके इसके लिए 8 जैमर मशीन तथा जेल में छुपे मोबाइल को ढूंढने के लिए फ्रांस निर्मित दो डिटेक्टर मशीन है जो कि ढाई फीट तक जमीन में कोई भी मोबाइल छुपा है उसे ढूंढ सकते हैं जेल परिसर 15 एकड़ में फैला है जेल अधीक्षक अनिल कुमार राय और जेलर सुरेश मिश्रा से वार्ता करने पर यह ज्ञात हुआ कि मिर्जापुर जेल 1901 में बना है| जेल 118 साल पुरानी होने के कारण सभी बैरकें दयनीय अवस्था में है जिससे बरसात में पानी टपकता रहता है और जेल का गंदा पानी जेल परिसर से बाहर करने के लिए पंप लगाकर बाहर करना पड़ता है जेलर का आवास भी गिरने की अवस्था में है जेल में मोनू प्रजापति डेंगू तथा मनोज शर्मा एचआईवी पीड़ित हैं निरीक्षण के उपरांत जॉन सचिव संजय श्रीवास्तव द्वारा बताया गया है की उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति जेल मैनुअल के अंतर्गत कार्य करती है जिस के मुख्य संरक्षक राज्यपाल होता है यह संस्था नारी सुधार, बाल सुधार, जेल में खानपान व्यवस्था, चिकित्सा व्यवस्था को देखती है समय-समय पर यह संस्था जेल का निरीक्षण करके शासन को रिपोर्ट भेजती रहती है निरीक्षण करने में मुख्य रूप से संजय श्रीवास्तव जोन सचिव/ जेल पर्यवेक्षक सहायक सचिव मयंक सिंह आनंद विश्वकर्मा अतुल श्रीवास्तव विनोद गुप्ता और सागर कसेरा आदि उपस्थित रहे |

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