टेक ज्ञानमोतिया झील पर सर्वधर्म के लोग उपस्थित हुए-MIRZAPUR

मोतिया झील पर सर्वधर्म के लोग उपस्थित हुए-MIRZAPUR

मिर्ज़ापुर में भी संत विनोवा भावे का जयन्ती मनाया गया विंध्याचल पहाड़ पर िस्थित मोतिया झील पर सर्वधर्म के लोग उपस्थित हुए जिसमे कई जिलों से लोगो ने शिरकत किया |वक्ताओं ने विनोवा भावे के जीवनी पर प्रकाश डाला व उनके सन्देश को संकल्पित होते हुए अनुसरण करने की प्रतिज्ञा ली गयी|उनके द्वारा लिखित कई पुस्तकों का स्टाल भी लगाया गया जिसमे लोगो ने अपनी रूची के अनुसार किताबो को खरीदा वक्ताओं ने कहा कि,भारत में भूदान तथा सर्वोदय आन्दोलनों के लिए सुपरिचित सन्त विनोबा भावे भगवदगीता से प्रेरित जनसरोकार वाले नेता थे । वह महात्मा गाँधी से बहुत प्रभावित थे तथा गाँधीजी के साथ उन्होंने देश के स्वाधीनता संग्राम में बहुत काम किया । उनकी आध्यात्मिक चेतना समाज से जुड़ी थी | इसी कारण सन्त स्वभाव के बावजूद उनमें राजनैतिक सक्रियता भी थी । उन्होने सामाजिक अन्याय तथा धार्मिक विषमता का मुकाबला करने के लिए देश की जनता को स्वयंसेवी होने का आह्वान किया । विनोबा भावे के इन्हीं सामाजिक सरोकारों के दायित्वपूर्ण कामों के लिए 1958 में उन्हें सामुदायिक नेतृत्व का पहला मैग्सेसे पुरस्कार प्रदान किया गया ।
11 सितम्बर 1895 को कोलाबा जिले के गाकोडा गाँव में जन्मे विनोबा भावे का असली नाम विनायक नरहरि भावे था। विनोबा के आध्यात्मिक विकास पर उनकी माँ रुक्मिणी देवी का गहरा प्रभाव था । विनोबा भावे ने इसी प्रभाव में महाराष्ट्र के सभी सन्त तथा दार्शनिकों को पढ़ा था | विनोबा भावे की गणित में विशेष रुचि थी ।
वर्ष 1916 में विनोबा भावे अपनी इन्टरमीडियेट की परीक्षा देने मुम्बई जा रहे थे । रास्ते में ही उनका मन बदला और वह बनारस की ओर चल पड़े । उनके मन में अनश्वर ज्ञान तथा अनादि ब्रह्म को जानने की अदम्य इच्छा जागी । बनारस में उन्होंने संस्कृत के पौराणिक ग्रन्थों का गहन अध्ययन किया ।| किया वक्ताओं ने विनोवा भावे के जीवनी पर प्रकाश डाला व उनके सन्देश को संकल्पित होते हुए अनुसरण करने की प्रतिज्ञा ली गयी|उनके द्वारा लिखित कई पुस्तकों का स्टाल भी लगाया गया जिसमे लोगो ने अपनी रूची के अनुसार किताबो को खरीदा वक्ताओं ने कहा कि,भारत में भूदान तथा सर्वोदय आन्दोलनों के लिए सुपरिचित सन्त विनोबा भावे भगवदगीता से प्रेरित जनसरोकार वाले नेता थे । वह महात्मा गाँधी से बहुत प्रभावित थे तथा गाँधीजी के साथ उन्होंने देश के स्वाधीनता संग्राम में बहुत काम किया । उनकी आध्यात्मिक चेतना समाज से जुड़ी थी | इसी कारण सन्त स्वभाव के बावजूद उनमें राजनैतिक सक्रियता भी थी । उन्होने सामाजिक अन्याय तथा धार्मिक विषमता का मुकाबला करने के लिए देश की जनता को स्वयंसेवी होने का आह्वान किया । विनोबा भावे के इन्हीं सामाजिक सरोकारों के दायित्वपूर्ण कामों के लिए 1958 में उन्हें सामुदायिक नेतृत्व का पहला मैग्सेसे पुरस्कार प्रदान किया गया ।
11 सितम्बर 1895 को कोलाबा जिले के गाकोडा गाँव में जन्मे विनोबा भावे का असली नाम विनायक नरहरि भावे था। विनोबा के आध्यात्मिक विकास पर उनकी माँ रुक्मिणी देवी का गहरा प्रभाव था । विनोबा भावे ने इसी प्रभाव में महाराष्ट्र के सभी सन्त तथा दार्शनिकों को पढ़ा था | विनोबा भावे की गणित में विशेष रुचि थी ।
वर्ष 1916 में विनोबा भावे अपनी इन्टरमीडियेट की परीक्षा देने मुम्बई जा रहे थे । रास्ते में ही उनका मन बदला और वह बनारस की ओर चल पड़े । उनके मन में अनश्वर ज्ञान तथा अनादि ब्रह्म को जानने की अदम्य इच्छा जागी । बनारस में उन्होंने संस्कृत के पौराणिक ग्रन्थों का गहन अध्ययन किया ।|

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