
चार माह पहले कुत्ते के काटने के बाद अधूरी वैक्सीन, युवक में रेबीज के लक्षण से हड़कंप
मिर्जापुर में एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि एक युवक को लगभग चार महीने पहले कुत्ते ने काट लिया था। उस समय उसने एंटी-रेबीज के कुछ इंजेक्शन तो लगवाए, लेकिन पूरी डोज नहीं लगवाई। अब अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसमें रेबीज जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे।
परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार युवक को तेज घबराहट, बेचैनी और अजीब व्यवहार होने लगा है। बताया जा रहा है कि वह कुत्ते जैसी आवाजें निकाल रहा है और उसे तेज दर्द भी हो रहा है। इस स्थिति को देखकर परिवार और आसपास के लोग बेहद चिंतित और दुखी हैं।
चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार कुत्ते के काटने के बाद अगर समय पर पूरी एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन की डोज पूरी नहीं ली जाती है, तो शरीर में रेबीज वायरस धीरे-धीरे सक्रिय हो सकता है। कई मामलों में इसके लक्षण हफ्तों से लेकर कई महीनों बाद तक भी सामने आ सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति में रेबीज के स्पष्ट लक्षण प्रकट हो जाते हैं—जैसे अत्यधिक घबराहट, पानी से डर लगना (हाइड्रोफोबिया), असामान्य आवाजें निकालना, मांसपेशियों में ऐंठन आदि—तो उस अवस्था में इलाज बेहद कठिन हो जाता है और अधिकांश मामलों में मरीज को बचाना संभव नहीं हो पाता। इसलिए इसे दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में से एक माना जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार कुत्ते, बंदर या किसी भी संदिग्ध जानवर के काटने के बाद तुरंत घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल में जाकर पूरी एंटी-रेबीज वैक्सीन की निर्धारित सभी डोज लगवानी चाहिए। यदि डोज अधूरी रह जाती है तो वैक्सीन का पूरा प्रभाव नहीं मिल पाता और संक्रमण का खतरा बना रहता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं लोगों के लिए बड़ी चेतावनी हैं। कुत्ते के काटने की घटना को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए और डॉक्टर द्वारा बताई गई पूरी वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए, क्योंकि रेबीज के लक्षण दिखने के बाद बचाव की संभावना बेहद कम रह जाती है।















