गंगा में गिरने वाले नालों और अपशिष्ट प्रबंधन की डीएम ने की गहन समीक्षा

जिलाधिकारी ने जिला पर्यावरणीय समिति, जिला गंगा समिति व वन भूमि अमलदरामद की समीक्षा बैठक की
मीरजापुर। जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पर्यावरणीय समिति, जिला गंगा समिति तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत धारा-4 एवं धारा-20 के अंतर्गत अधिसूचित वन भूमि की अमलदरामद से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी राकेश कुमार, अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) विजेता, उप प्रभागीय वनाधिकारी चुनार, उपायुक्त श्रम रोजगार (मनरेगा), भूगर्भ जल विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जिलाधिकारी द्वारा आगामी वर्षाकाल 2026 में प्रस्तावित वृक्षारोपण महाअभियान की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को वृक्षारोपण कार्य में सावधानियां बरतने तथा रोपण स्थलों की शत-प्रतिशत जीओ-टैगिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पौधों के चयन, उनकी सुरक्षा एवं नियमित रख-रखाव के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया।
जिलाधिकारी ने कृषकों को वितरित किए जाने वाले पौधों में फलदार एवं इमरती लकड़ी वाली प्रजातियों को शामिल करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जैव विविधता के संरक्षण के उद्देश्य से पीपल, पाकड़, गुलर, बरगद, नीम, महोगनी, जामुन आदि प्रजातियों को कार्ययोजना में सम्मिलित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा कंस्ट्रक्शन एवं डिमोलिशन वेस्ट प्रबंधन से संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों द्वारा प्रस्तुत अनुपालन आख्या का परीक्षण करते हुए निर्देश दिया कि किए जा रहे सभी अपशिष्ट प्रबंधन कार्यों को समाहित कर रिपोर्ट जिला गंगा समिति एवं जिला पर्यावरणीय समिति के समक्ष प्रस्तुत की जाए। इसके साथ ही गंगा नदी में मिलने वाले नालों एवं एसटीपी की स्थिति की समीक्षा की गई तथा जिला गंगा समिति द्वारा चिन्हित किए गए प्रमुख बिंदुओं (Key Issues) पर हुई प्रगति की जानकारी ली गई।
इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी द्वारा जनपद में वन भूमि की अमलदरामद की अद्यतन स्थिति की भी समीक्षा की गई। उन्होंने निर्देश दिया कि भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-4 एवं धारा-20 के अंतर्गत अधिसूचित आरक्षित वन भूमि की अभिलेखों में शेष अमलदरामद का कार्य राजस्व एवं वन विभाग आपसी समन्वय से शीघ्र पूर्ण करें और अद्यतन प्रगति रिपोर्ट पुनः प्रस्तुत करें।

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