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चंद अमीर लोगों को गरीबों का हक छीन कर पैसे बांटे गए-ललितेशपति त्रिपाठी

पिछले पांच वर्षों में चंद अमीर लोगों को गरीबों का हक छीन कर पैसे बांटे गए. कांग्रेस की यूपीए सरकार के समय 2014 तक बैंकों का एनपीए था 2,40,000 करोड़ और 2019 में एनपीए हो गया 12,30,000 करोड़. अगर देश के बड़े-बड़े पूंजीपतियों को दोनों हाथों से धन नहीं बांटा गया तो आखिर किस दर से बैंकों का एनपीए 6 गुना हो गया. राशन की दुकानों पर गरीबों को मिलने वाली चीनी कम कर दी गई. अगर गरीबों की चीनी कम की गई तो जाहिर है किसी और की मिठास बढ़ी ही होगी. लेकिन अब इस अन्याय को न्याय में बदलने का वक्त आ गया है. जब बड़े-बड़े पूंजीपतियों को टैक्स में मिलने वाली छूट में कटौती कर देश के सबसे गरीब परिवारों के खाते में डाला जाएगा. ललितेशपति त्रिपाठी ने यह बातें न्याय पर चर्चा के दौरान पटेहरा ब्लॉक के विभिन्न गांवों में चौपालों के दौरान कही. ललितेशपति त्रिपाठी ने कहा कि देश की बहुत बड़ी आबादी महीने भर हाड़-तोड़ मेहनत करने के बावजूद 12000 रुपया महीना नहीं कमा सकती. लेकिन अब गरीबों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा. कांग्रेस पार्टी की सरकार हर गरीब के साथ न्याय करेगी और दुनिया की सबसे बड़ी न्यूनतम आय योजना से देश की गरीबी पर अंतिम प्रहार करते हुए 25 करोड़ लोगों को इस अभिशाप से मुक्त कराएगी.यही नहीं जब लोगों के खाते में यह पैसा आएगा तो आस-पास के बाजार में ही खर्च होगा. बाजार में रौनक आएगी. सामान की मांग बढ़ने से कल-कारखाने-उद्योग लगेंगे. इस तरह रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी. ललितेशपति त्रिपाठी ने कहा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया, रजवाड़ों का भत्ता बंद किया, गरीबों को भूमि और आवास के लिए योजना चली. स्वर्गीय राजीव गांधी ने सत्ता के विकेंद्रीकरण के उद्देश्य से पंचायती राज व्यवस्था की अभूतपूर्व पहल की. इस व्यवस्था में दलित-पिछड़ों-महिलाओं को आरक्षण के जरिए वंचित वर्ग को आवाज दी. लेकिन इस देश का दुर्भाग्य रहा कि गरीबों की बात करने वाले इन दोनों प्रधानमंत्रियों की हत्या कर दी गई. अब यह सोचने का समय आ गया है कि वो कौन लोग हैं जो गरीबी खत्म नहीं करना चाहते?

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