छानबे। बिजयपुर शितलाधाम में नवरात्रि के सातवे दिन वह भी सोमवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता का दर्शन पूजन किये ।अपनी अपनी मनौती के अनुसार माँ भक्त हलुआ पूड़ी नारियल चुनरी व पताका आदि चढ़ा कर अपने सुख समृद्धि की कामना की बिजयपुर शितलाधाम धाम एक ऐसा धाम है जहां आषाढ़ सावन मास दो महिना पत्रेक सोमवार व बुधवार को भीषड मेला लगता ।नवरात्रि में भक्त गण माँ का दर्शन करके और ही निहाल हो जाते है । यहां पर माँ शीतला अपनी एक और शक्ति के रूप में विराजमान है जो शितलाधाम बिजयपुर के बगल डेरवा गांव में शितलाधाम धाम से दो किलोमीटर दूर कर्णावती नदी पर दुलरोमाता के नाम से विख्यात है ।भक्त गण पहले दुलारो माता का दर्शन पूजन करते हैं उसके पश्चात बिजयपुर स्थित शितला माता का दर्शन कर अपने को सौभाग्य शाली मानते है।भक्त गण प्रसाद के रूप में तरह तरह के समान की भी खरीददारी कर घर ले जाते है ।महिलाए अपने अखण्ड सुहाग के लिए सिंदूर बिंदी चूड़ी कंगन आदि सुहाग का सामान की खरीददारी करती है ।बच्चे भी अपने खेलने के समान की खरीदारी में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है ।बिजयपुर शितलाधाम धाम में माता को जल चढ़ाने व पीने के पानी में बराबर धक्का मुक्की होती है ।महज दो हैंडपंप के सहारे ही मेला चलता है।नकोई टैंकर और न कोई और पानी पीने व्यवस्था ।सफाई के नाम पर गंदगी का अंबार लगा है ।सहायक विकास अधिकारी पंचायत से बात किए तो उन्होंने दोनों जगह सफाईकर्मी लगे होने की बात किए परन्तु माँ के भक्त गन्दगी से ही गुजर कर माँ दर्शन पूजन करने को मजबूर है ।इसके अलवा अकोढ़ी के कंकाल काली मंदिर अरगी सरपति के पहाड़ी पर माँ नंदजा देबी के मंदिर पर आज सप्तमी को शानिवार दिन पड़ने से विशेष महत्व है ।जिससे श्रद्धालुओं का भीड़ उमड़ी है ।
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