मिर्जापुर के प्रथम सांसद से जुड़ी संपत्ति का मामला गरमाया

मिर्जापुर के प्रथम सांसद से जुड़ी संपत्ति का मामला गरमाया, पीड़िता शकुंतला देवी ने नगर पालिका से मांगा स्पष्टीकरण

मिर्जापुर। मिर्जापुर के प्रथम सांसद से जुड़ी बताई जा रही वार्ड संख्या छ भवन संख्या 478/1 एवं 478/2 (बाल निकेतन विल्सन नर्सरी स्कूल एवं बंगला)मंडलीय अस्पताल के पास की संपत्ति का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में पीड़िता शकुंतला देवी ने नगर पालिका परिषद के अभिलेखों में किए गए नाम परिवर्तन और टैक्स वसूली को लेकर अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद मिर्जापुर को प्रार्थना पत्र देकर स्पष्ट जानकारी मांगी है। साथ ही उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी मिर्जापुर को भी पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने और जांच कराने की मांग की है।

प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि नगर पालिका परिषद के वर्ष 1962 के असेसमेंट रजिस्टर की प्रमाणित प्रति के अनुसार भवन संख्या 478/1 (बंगला) और 478/2 (बाल निकेतन विल्सन नर्सरी स्कूल) दोनों संपत्तियां जे. एन. विल्सन के नाम “सेल्फ” के रूप में दर्ज थीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि उक्त संपत्ति स्वयं जे. एन. विल्सन की थी, न कि किसी लीज या ट्रस्ट के अंतर्गत। यदि संपत्ति लीज पर होती या ट्रस्ट की होती, तो नगर पालिका के अभिलेखों में लीज होल्डर या ट्रस्ट का नाम दर्ज होता।

पीड़िता ने बताया कि नगर पालिका के रिकॉर्ड में वर्ष 2016 तक लगातार मिसेज विल्सन (पत्नी जे. एन. विल्सन) का नाम दर्ज रहा। वहीं नगर पालिका के पुराने स्टेटमेंट में यह दावा किया गया है कि वर्ष 1956 में जमीन लीज पर दी गई थी और 1986 में लीज समाप्त हो गई। लेकिन 1962 के असेसमेंट रजिस्टर में कहीं भी लीज होल्डर का उल्लेख नहीं मिलता, जिससे पूरे मामले में गंभीर विरोधाभास सामने आता है।

प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि वर्ष 1998 के बैनामे में केवल प्लॉट नंबर 4/1 एवं 4/2, मौजा रमई पट्टी, चर्च कंपाउंड, मिर्जापुर का उल्लेख है, जबकि भवन संख्या 478/1 और 478/2, बाल निकेतन स्कूल, बंगला या हॉस्पिटल रोड का कोई विवरण नहीं दिया गया है। ऐसे में केवल प्लॉट नंबर 4/1 और 4/2 के आधार पर भवन संख्या 478/1 और 478/2 की पहचान कर नामांतरण किया जाना गंभीर त्रुटि प्रतीत होता है।

पीड़िता शकुंतला देवी ने नगर पालिका परिषद से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि वर्ष 2016 में मिसेज विल्सन का नाम हटाकर किसी दूसरे का नाम किस आदेश और किस आधार पर दर्ज किया गया। इसके साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या इस पहचान के लिए किसी नक्शे, सर्वे रिपोर्ट, सीमांकन या अन्य अभिलेख का सहारा लिया गया था।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि यदि यह संपत्ति वास्तव में लीज पर थी, तो वर्ष 1962 से 2016 तक नगर पालिका के अभिलेखों में विल्सन परिवार का नाम लगातार क्यों दर्ज रहा।

प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश म्युनिसिपैलिटीज एक्ट 1961 की धारा 105 और 106 के अनुसार नगर पालिका को अपने अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट और लिखित उत्तर देना अनिवार्य है। पीड़िता ने यह भी कहा है कि किसी मामले में न्यायालय में वाद लंबित होने का बहाना बनाकर अभिलेखों से संबंधित जानकारी देने से इंकार नहीं किया जा सकता।

पीड़िता शकुंतला देवी ने नगर पालिका परिषद से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि वर्तमान में टैक्स किस आधार पर वसूला जा रहा है—खाली प्लॉट नंबर 4/1 और 4/2 के आधार पर या पूर्व से निर्मित भवन संख्या 478/1 और 478/2 के आधार पर, और यह टैक्स कानूनी रूप से किसके ऊपर लागू होता है। उन्होंने पूरे मामले में नगर पालिका के अभिलेखों के आधार पर विस्तृत और बिंदुवार स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

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