
ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के विरोध में पंचायत सचिवों का आंदोलन तेज
मिर्जापुर। शासन द्वारा लागू की गई ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली एवं अतिरिक्त विभागीय कार्यों के विरोध में जिले के ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी संयुक्त रूप से आंदोलन की राह पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि ग्राम स्तर पर नेटवर्क, संसाधन और तकनीकी सुविधाओं की कमी के कारण यह व्यवस्था लागू करना व्यवहारिक नहीं है। इस संबंध में रोष पत्र जिलाधिकारी को भेज दिया गया है। आंदोलन में राजाराम, श्यामधर तिवारी, उमाकांत, दिनेश कुमार, मनोज यादव, आलोक श्रीवास्तव, आलोक राव, प्रदीप कुमार, प्रभात शुक्ला, विजय प्रताप और धीरेन्द्र गुप्ता अग्रिम भूमिका में हैं।
पंचायत सचिवों द्वारा घोषित चरणबद्ध कार्यक्रम के तहत 1 से 4 दिसंबर तक सभी सचिव काली पट्टी बांधकर शासकीय कार्य करते हुए सांकेतिक विरोध करेंगे। इसके बाद 5 दिसंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक सभी विकास खंडों पर शांतिपूर्ण सत्याग्रह आयोजित होगा, जहाँ बीडीओ के माध्यम से जिलाधिकारी और राज्य सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा। ज्ञापन के पश्चात सचिव अपने सभी विभागीय व जनपद स्तरीय आधिकारिक वाट्सऐप समूहों से स्वयं को अलग कर लेंगे और केवल आवश्यक विभागीय कार्यों तक सीमित रहेंगे। सचिवों ने क्षेत्रीय भ्रमण के लिए दिए जा रहे मात्र 200 रुपये साइकिल भत्ते को अव्यावहारिक बताते हुए मोटरसाइकिल भत्ता पुनः जारी करने की भी मांग की है।
पंचायत सचिवों ने स्पष्ट किया है कि 15 दिसंबर से वे ई-ग्राम/गेटवे प्रणाली और संबंधित मोबाइल ऐप का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। उनका कहना है कि यह ऐप ग्राम स्तर पर सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रहा है और अनावश्यक जटिलताएँ बढ़ा रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सचिवों—राजाराम, श्यामधर तिवारी, उमाकांत, दिनेश कुमार, मनोज यादव, आलोक श्रीवास्तव, आलोक राव, प्रदीप कुमार, प्रभात शुक्ला, विजय प्रताप और धीरेन्द्र गुप्ता—ने संयुक्त बयान में चेतावनी दी है कि यदि शासन ने समस्याओं पर समयबद्ध समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।















