योगी सरकार के प्रयास से मीरजापुर में वज्रपात मौतों में 50 प्रतिशत की कमी

योगी सरकार के प्रयास से मीरजापुर में वज्रपात मौतों में 50 प्रतिशत की कमी
लखनऊ, 28 जनवरी।
योगी सरकार प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने की दिशा में लगातार ठोस और वैज्ञानिक कदम उठा रही है। इसी क्रम में मीरजापुर जिले में आकाशीय बिजली से सुरक्षा के लिए लागू किए गए “लाइटनिंग रेज़िलिएंसी मॉडल” ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। सरकारी प्रयासों का ही परिणाम है कि मीरजापुर में वज्रपात से होने वाली मौतों में लगभग 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि इसे शून्य तक लाने की दिशा में कार्य जारी है।
गौरतलब है कि भौगोलिक संरचना, पथरीली जमीन और व्यापक खनन गतिविधियों के कारण मीरजापुर देश के सबसे अधिक वज्रपात-संवेदनशील जिलों में शामिल रहा है। बीते वर्षों में यहां आकाशीय बिजली गिरने से बड़ी संख्या में जनहानि हुई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता पर लेते हुए वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर ठोस कार्ययोजना तैयार की गई।
उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं राहत आयुक्त कार्यालय के सहयोग से जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मीरजापुर को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और व्यापक जन-जागरूकता अभियानों से सशक्त किया गया। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों को हर हाल में रोकने और न्यूनतम करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। उन्हीं निर्देशों के तहत मीरजापुर में लाइटनिंग मिटिगेशन प्रोजेक्ट को प्रभावी ढंग से लागू किया गया।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में वज्रपात से 30, वर्ष 2020 में 28, वर्ष 2021 में 23 और वर्ष 2022 में 30 लोगों की मौत हुई थी। वहीं वर्ष 2024-25 और वर्ष 2025-26 में अब तक यह संख्या घटकर 14 रह गई है, जो सरकारी प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।
वैज्ञानिक अध्ययन के तहत भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के परियोजना आंकलन, आईआईटीएम पुणे के स्थलीय डाटा, आईआईटी रुड़की से जुड़े शोधकर्ताओं के अध्ययन तथा सीआरओपीसी द्वारा किए गए संवेदनशीलता विश्लेषण के आधार पर जिले में वज्रपात के ‘लाइटनिंग हॉटस्पॉट’ चिन्हित किए गए। अध्ययन में सामने आया कि अधिकांश मौतें खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे, जल स्रोतों के पास और कच्चे मकानों में होती हैं। इसके बाद पूरे जिले का लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप तैयार किया गया।
इस मैप के आधार पर पहले चरण में जिले के चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों में 80 स्थानों पर अर्ली स्ट्रीमर एमिशन आधारित लाइटनिंग अरेस्टर लगाए गए। ये अरेस्टर आकाशीय बिजली को सुरक्षित रूप से धरती में प्रवाहित कर देते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्र में जान-माल की हानि नहीं होती। कई अरेस्टरों में लगे इंडिकेटर यह दर्शाते हैं कि वे कई बार बिजली को सफलतापूर्वक अवशोषित कर चुके हैं।
तकनीकी उपायों के साथ-साथ पूरे जिले में ‘वज्रपात सुरक्षा कार्यक्रम’ भी चलाया गया। इसके तहत ब्लॉक, जिला और ग्राम पंचायत स्तर पर अधिकारियों, ग्राम प्रधानों, लेखपालों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, युवाओं और आम नागरिकों को बिजली गिरने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई। साथ ही ‘दामिनी’ मोबाइल ऐप के माध्यम से समय से चेतावनी प्राप्त करने का प्रशिक्षण भी दिया गया।
जिले की सभी 809 ग्राम पंचायतों में माइकिंग, जागरूकता रथ, पोस्टर, वीडियो और पंचायत स्तरीय कार्यशालाओं के जरिए संदेश पहुंचाया गया। सिनेमा हॉलों में भी वज्रपात से बचाव पर आधारित वीडियो दिखाए गए, जबकि सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से मौसम विभाग की चेतावनियां तेजी से आमजन तक पहुंचाई गईं।
योगी सरकार के इन समन्वित और वैज्ञानिक प्रयासों का ही परिणाम है कि मीरजापुर में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है। प्रशासन का लक्ष्य अब इसे पूरी तरह शून्य तक लाने का है, जिससे मीरजापुर देश के लिए आपदा प्रबंधन का एक प्रभावी मॉडल बन सके।

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