36 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी की आवश्यकता होगी मिर्जापुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड के लिए

अपर खजुरी बांध का पानी सशर्त मिलेगा मिर्जापुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट को, सिंचाई और पेयजल को दी गई प्राथमिकता
मीरजापुर।
मिर्जापुर में प्रस्तावित मिर्जापुर थर्मल एनर्जी (यूपी) प्राइवेट लिमिटेड को अपर खजुरी बांध से पानी उपलब्ध कराए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। नहर विभाग के आदेश के अनुसार यह साफ किया गया है कि थर्मल पावर प्रोजेक्ट को पानी बिना शर्त नहीं, बल्कि सिंचाई और पेयजल की आवश्यकताओं के बाद ही उपलब्ध कराया जाएगा।
किसान प्रतिनिधियों द्वारा यह आपत्ति दर्ज कराई गई थी कि यदि अपर खजुरी बांध का पानी औद्योगिक परियोजना को दिया गया तो क्षेत्र की रबी फसल की सिंचाई प्रभावित होगी और बड़ी कृषि भूमि सिंचाई से वंचित हो सकती है। इस पर अधिशासी अभियंता, मीरजापुर नहर प्रखंड द्वारा शासन को रिपोर्ट भेजी गई।
शासन के पत्र के अनुसार प्रस्तावित तापीय विद्युत परियोजना को प्रति वर्ष लगभग 36 एमसीएम पानी की आवश्यकता होगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि 31 दिसंबर तक अपर खजुरी बांध गंगा नदी से पूर्ण क्षमता तक भरा रहता है, तभी आगे पानी के उपयोग पर विचार किया जा सकता है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि रबी की सिंचाई के लिए लगभग 9.5 एमसीएम पानी पहले उपयोग में लाया जाएगा।
आदेश के अनुसार पावर प्रोजेक्ट को 01 जनवरी से 30 जून के बीच अधिकतम 18 एमसीएम पानी (छह माह की अवधि के लिए) उपयोग करने की बात कही गई है, लेकिन यह पूरी तरह जल उपलब्धता पर निर्भर होगा।
नहर विभाग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सिंचाई और पेयजल की मात्रा अलग करने के बाद यदि बांध में पानी कम पाया गया, तो मिर्जापुर थर्मल एनर्जी (यूपी) प्राइवेट लिमिटेड को पानी उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा। यानी किसानों की सिंचाई और आम जनता के पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
इस आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि मिर्जापुर में प्रस्तावित थर्मल पावर प्रोजेक्ट को पानी की आपूर्ति पूरी तरह सशर्त है और जल संकट की स्थिति में औद्योगिक उपयोग पर रोक लगाई जा सकती है। किसानों का कहना है कि यह आदेश उनके हितों की रक्षा करने वाला है और सिंचाई व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

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