बांट माप मंत्री का मिर्जापुर से विशेष लगाव फिर भी पत्थरों से हो रही तौल

मिर्जापुर में सब्जी-फल की तौल में खुली लूट, प्रमाणित बाट की जगह पत्थरों से हो रही तौल, संगमोहाल पुल के नीचे हालात सबसे बदतर
मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश के जनपद मिर्जापुर में सब्जी और फलों की खरीद-बिक्री में उपभोक्ताओं के साथ खुलेआम धोखाधड़ी की जा रही है। शहर से लेकर कस्बों तक ठेले, फुटपाथ और दुकानों पर प्रमाणित बाटों की जगह पत्थरों से तौल की जा रही है, जिससे आम जनता को कम वजन देकर ज्यादा पैसा वसूला जा रहा है।
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र संगमोहाल पुल के नीचे का इलाका बताया जा रहा है, जहां लगी अधिकांश सब्जी और फल की दुकानों व ठेलों पर कम तौल आम बात हो चुकी है। तराजू के कांटे पर मनमाने वजन के पत्थर रखकर एक किलो के नाम पर 800 से 900 ग्राम ही सामान दिया जा रहा है।
नियमों के अनुसार सब्जी और फलों की तौल केवल नाप-तौल विभाग से प्रमाणित और सील लगे बाटों से ही होनी चाहिए, लेकिन संगमोहाल पुल के नीचे और आसपास के क्षेत्रों में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ग्राहक जब तौल पर सवाल उठाते हैं तो कई ठेले वाले बहस करने लगते हैं या साफ कह देते हैं कि “यहीं लेना है तो लो, वरना आगे बढ़ो।”
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में बांट-माप (नाप-तौल) विभाग की जिम्मेदारी तकनीकी शिक्षा, उपभोक्ता संरक्षण एवं बांट-माप मंत्रालय के अंतर्गत आती है, जिसके मंत्री आशीष पटेल हैं। इसके बावजूद मिर्जापुर जनपद में विभागीय निगरानी न के बराबर दिखाई दे रही है, जिससे यह अवैध तौल व्यवस्था लगातार फल-फूल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर जांच अभियान चलाया जाए और तराजू-बाट की सघन जांच हो, तो पत्थरों से तौल जैसी गड़बड़ी तुरंत खत्म हो सकती है। लेकिन विभागीय चुप्पी से ठेले वालों के हौसले बुलंद हैं।
उपभोक्ताओं ने मांग की है कि संगमोहाल पुल के नीचे समेत पूरे शहर में विशेष नाप-तौल जांच अभियान चलाया जाए और पत्थरों से तौल करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस खुलेआम हो रही लूट पर कब तक आंखें मूंदे रहता है, या फिर आम जनता को उनका हक दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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