
डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार, लापरवाही पड़ सकती है भारी : डॉ. के. एम. चौधरी
मिर्जापुर। बरसात के मौसम में डेंगू और चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों को लेकर एमडी जनरल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. के. एम. चौधरी ने पत्रकार वीरेंद्र गुप्ता से विशेष वार्ता के दौरान लोगों को सतर्क रहने और बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी।
डॉ. चौधरी ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही मच्छरों के काटने से फैलने वाले वायरल रोग हैं। डेंगू में तेज बुखार, शरीर और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी तथा प्लेटलेट्स में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं चिकनगुनिया में तेज बुखार के साथ जोड़ों में असहनीय दर्द होता है, जो कई बार महीनों तक बना रह सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि समय पर इलाज और निगरानी न हो तो डेंगू गंभीर रूप ले सकता है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा मधुमेह, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों में इसका खतरा अधिक रहता है।
डॉ. चौधरी ने लोगों से घर और आसपास पानी जमा न होने देने, कूलर, गमलों और टायरों में रुके पानी को नियमित रूप से बदलने, पूरी बांह के कपड़े पहनने तथा मच्छरदानी और मच्छररोधी उपायों का प्रयोग करने की अपील की। उन्होंने बताया कि दिन के समय काटने वाले एडीज मच्छर से बचाव ही डेंगू और चिकनगुनिया से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है।
एक सवाल के जवाब में डॉ. चौधरी ने कहा कि समाज में यह धारणा प्रचलित है कि पपीते के पत्तों का रस, कीवी या कुछ विशेष फल खाने से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ जाते हैं, जबकि इसके पक्ष में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये फल सामान्य पोषण और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें प्लेटलेट्स बढ़ाने की निश्चित या प्रमाणित दवा नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि डेंगू के मरीजों में सबसे महत्वपूर्ण बात नियमित चिकित्सकीय निगरानी, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार कराना है। किसी भी प्रकार की अफवाह या अप्रमाणित घरेलू उपचारों पर निर्भर रहने के बजाय समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है।















