
एमआरपी हजारों में, बाजार में 80 से 90 फीसदी तक कम दाम पर बिक रहे सामान, कीमतों के खेल पर उठे सवाल
चार्जर से लेकर दवाओं तक में भारी अंतर, ग्राहक असमंजस में कि आखिर सही कीमत कौन सी
मीरजापुर। बाजार में इन दिनों कई ऐसे उत्पाद देखने को मिल रहे हैं, जिनकी पैकिंग पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) काफी अधिक अंकित रहता है, लेकिन वही सामान ग्राहकों को एमआरपी से 80 से 90 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध होने का दावा किया जाता है। मोबाइल चार्जर, इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज और कुछ दवाओं समेत विभिन्न उत्पादों की कीमतों में दिखाई देने वाला यह भारी अंतर अब ग्राहकों के बीच चर्चा का विषय बन रहा है।
सवाल यह है कि यदि कोई उत्पाद अपनी अंकित कीमत से 80 या 90 प्रतिशत कम दाम पर बेचा जा सकता है, तो उसकी वास्तविक कीमत क्या है? क्या एमआरपी तय करते समय ही कीमत इतनी अधिक रखी जाती है या फिर बाजार में प्रतिस्पर्धा, कंपनी की छूट और विक्रेताओं के मुनाफे के कारण इतना अंतर दिखाई देता है? इन सवालों का जवाब जानना उपभोक्ताओं के लिए जरूरी हो गया है।
कीमतों के अंतर से ग्राहक हैरान
मोबाइल चार्जर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुकानों पर कई उत्पाद ऐसे मिलते हैं, जिनकी पैकिंग पर सैकड़ों या हजारों रुपये तक की एमआरपी लिखी होती है, जबकि ग्राहक उन्हें काफी कम कीमत पर खरीद लेते हैं। इसी तरह दवाओं के मामले में भी कुछ उत्पादों की अंकित कीमत और अलग-अलग स्थानों पर मिलने वाली छूट को लेकर उपभोक्ता सवाल उठाते हैं। हालांकि, प्रत्येक उत्पाद की कीमत में अंतर के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं और सभी वस्तुओं के मामले में एक ही निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
दवाओं के मामले में अधिक सतर्कता जरूरी
दवाओं की कीमतों में अंतर का मामला स्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण अधिक संवेदनशील है। दवा की कीमत, उसकी गुणवत्ता, निर्माता, बैच, एक्सपायरी और वैध बिक्री से जुड़े पहलुओं की जांच करना जरूरी है। केवल कम कीमत देखकर किसी दवा को नकली या खराब नहीं कहा जा सकता, उसी तरह भारी छूट को गुणवत्ता की गारंटी भी नहीं माना जा सकता। ग्राहकों को दवा खरीदते समय पैक पर अंकित विवरण, एक्सपायरी और बिल पर ध्यान देना चाहिए।
उपभोक्ताओं में पारदर्शिता की अपेक्षा
बाजार में एमआरपी और बिक्री मूल्य के बीच भारी अंतर यह सवाल खड़ा करता है कि उत्पादों की कीमत तय करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। उपभोक्ताओं का हित इसी में है कि उन्हें किसी वस्तु की वास्तविक उपयोगिता, गुणवत्ता और उचित बाजार मूल्य की जानकारी मिले, ताकि वे केवल बड़ी एमआरपी या भारी छूट देखकर खरीदारी का निर्णय न लें।
विशेषज्ञों की राय में ग्राहकों को अलग-अलग दुकानों पर कीमतों की तुलना करनी चाहिए और उत्पाद की गुणवत्ता, वारंटी तथा बिल की उपलब्धता भी देखनी चाहिए। वहीं, संबंधित विभागों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बाजार में मूल्य निर्धारण और बिक्री के नियमों का पालन हो तथा किसी प्रकार की भ्रामक छूट या गलत जानकारी के जरिए ग्राहकों को गुमराह न किया जाए।















