
नेवढ़िया घाट घटना: भीड़तंत्र पर सख्ती जरूरी, कानून से ऊपर कोई नहीं
मिर्जापुर। देहात कोतवाली थाना क्षेत्र के नेवढ़िया घाट में शनिवार को शराब दुकान को लेकर हुआ विवाद अब कानून व्यवस्था और भीड़तंत्र के बीच टकराव की गंभीर चेतावनी बनकर सामने आया है। विरोध के नाम पर एकत्रित हुई भीड़ द्वारा दुकान संचालक की घेराबंदी कर उससे जबरन माफी मंगवाना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि अगर समय रहते रोक नहीं लगी तो भीड़तंत्र हावी हो सकता है।
घटना के दौरान पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हालात पर प्रभावी नियंत्रण न होना भी चिंता का विषय है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ ने अपने तरीके से “न्याय” करने की कोशिश की, जो सीधे तौर पर विधि-व्यवस्था के लिए चुनौती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे आबादी के बीच संचालित शराब दुकान का लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। उनकी शिकायतें अपनी जगह हो सकती हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में कानून को हाथ में लेना स्वीकार्य नहीं है।
इस संबंध में एक पुलिस अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि किसी भी समस्या या आपत्ति के समाधान के लिए वैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया तय है, जिसका पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कानून को हाथ में लेने या किसी को जबरन अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे कानून व्यवस्था पर खतरा उत्पन्न होता है।
कानूनी विशेषज्ञों का भी कहना है कि घेराबंदी, जबरन दबाव, सार्वजनिक अपमान या किसी को “सजा” देना दंडनीय कृत्य है। यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो इससे गलत संदेश जाता है और भविष्य में भीड़तंत्र को बढ़ावा मिल सकता है।
घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। अब आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करे और यह स्पष्ट संदेश दे कि कानून से ऊपर कोई नहीं।















