
IAS से राजनीति तक: दिव्या मित्तल की नई पार्टी ‘जन नीति भारत’ से पूर्वांचल की सियासत में नई चर्चा
2027 के विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान, जनता की भागीदारी और जवाबदेही पर जोर; मीरजापुर से चुनाव लड़ने की अटकलों पर भी नजर
मीरजापुर। भारतीय प्रशासनिक सेवा में 13 वर्ष तक काम करने के बाद राजनीति में कदम रखने वाली पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जन नीति भारत’ की घोषणा कर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई पारी शुरू कर दी है। 15 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सभी राजनीतिक ताकतों के बीच अपनी जगह बनाने का प्रयास करेगी। उनके इस ऐलान के बाद खासकर मीरजापुर और पूर्वांचल की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
राजनीति नहीं, जननीति को बनाया आधार
दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीतिक सोच को ‘राजनीति नहीं, जननीति’ के विचार से जोड़ा है। उनका कहना है कि समस्या राजनीतिक दलों की कमी नहीं, बल्कि आम लोगों की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं मिलना है। वह ऐसी व्यवस्था की बात कर रही हैं जिसमें जनता केवल चुनाव के समय मतदाता बनकर न रहे, बल्कि सरकार की नीतियों के निर्माण और उनके क्रियान्वयन में भी उसकी भागीदारी हो।
नई पार्टी के साथ उन्होंने तीन प्रमुख संकल्प सामने रखे हैं। पहला, नीतियों के निर्माण में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना। दूसरा, फैसले जाति, धर्म, प्रभाव या पहचान के बजाय जरूरत के आधार पर लेना। तीसरा, जनप्रतिनिधियों और सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना। इन संकल्पों को उन्होंने अपनी पार्टी की राजनीतिक दिशा के रूप में प्रस्तुत किया है।
प्रशासनिक अनुभव को राजनीतिक व्यवस्था में बदलने की चुनौती
दिव्या मित्तल की पहचान एक ऐसी अधिकारी के रूप में बनी, जिनका मीरजापुर में जिलाधिकारी के कार्यकाल के दौरान दूरस्थ गांव लहुरियादह तक पाइप से पेयजल पहुंचाने के मामले में विशेष उल्लेख हुआ था। इस गांव के लोगों को लंबे समय तक पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता था। उनके प्रशासनिक कार्यकाल की इस उपलब्धि ने उन्हें जिले से बाहर भी पहचान दिलाई।
हालांकि प्रशासन और राजनीति की कार्यशैली में बड़ा अंतर है। प्रशासनिक अधिकारी के पास सरकारी नियमों, विभागीय मशीनरी और निर्धारित अधिकारों के तहत काम करने की व्यवस्था होती है, जबकि राजनीतिक दल को संगठन खड़ा करना, कार्यकर्ताओं को जोड़ना, जनता के बीच निरंतर संवाद बनाए रखना और अपने कार्यक्रमों को चुनावी प्रक्रिया में प्रस्तुत करना पड़ता है।
ऐसे में दिव्या मित्तल के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती अपने प्रशासनिक अनुभव को एक व्यापक राजनीतिक संगठन और स्पष्ट जनकार्यक्रम में बदलने की होगी।
मीरजापुर पर क्यों टिकी हैं निगाहें?
मीरजापुर से दिव्या मित्तल का पुराना प्रशासनिक जुड़ाव रहा है। इसी कारण उनके यहां से विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में मीरजापुर नगर या सदर सीट को लेकर संभावना जताई गई है। हालांकि चुनाव लड़ने की सीट के संबंध में उनकी ओर से आधिकारिक पुष्टि को स्पष्ट रूप से स्थापित करना अभी जरूरी है। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
यदि वह मीरजापुर से चुनाव लड़ने का निर्णय लेती हैं, तो उनके सामने अपने पूर्व प्रशासनिक कार्यों के आधार पर बनी पहचान को वर्तमान स्थानीय समस्याओं, विकास की जरूरतों और जनता की अपेक्षाओं से जोड़ने का प्रश्न होगा। साथ ही उन्हें यह भी स्पष्ट करना होगा कि उनकी पार्टी जिले और प्रदेश के लिए किन ठोस योजनाओं तथा नीतियों के साथ जनता के बीच जाएगी।
बिना बड़े संसाधनों के संगठन खड़ा करने का दावा
दिव्या मित्तल ने कहा है कि उनकी पार्टी के पास बड़े पैमाने पर विज्ञापन करने के संसाधन नहीं हैं। इसके बजाय वह घर-घर संपर्क और समर्थकों की भागीदारी पर भरोसा करना चाहती हैं। उनका विचार है कि प्रत्येक घर संपर्क का केंद्र और प्रत्येक समर्थक अभियान का हिस्सा बन सकता है।
यह मॉडल जनता से सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास है। लेकिन प्रदेशव्यापी चुनाव में इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए बूथ स्तर तक संगठन, प्रशिक्षित कार्यकर्ता, स्थानीय नेतृत्व, चुनावी संसाधन और लगातार जनसंपर्क की जरूरत होगी। पार्टी इन जरूरतों को किस तरह पूरा करती है, यह उसके संगठनात्मक विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत होगा।
राजनीतिक विश्लेषण: विचार से आगे परिणाम तक का सफर
दिव्या मित्तल की नई राजनीतिक पारी को केवल एक पूर्व आईएएस अधिकारी के चुनाव लड़ने के फैसले के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। उनकी घोषित प्राथमिकताएं जनता की भागीदारी, जरूरत के आधार पर निर्णय और जवाबदेही हैं। अब इन विचारों को व्यावहारिक योजनाओं, उम्मीदवारों के चयन और स्थानीय स्तर पर काम करने वाली टीम के रूप में सामने लाना होगा।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जन नीति भारत प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कितना संगठन बना पाती है, उसकी नीतियां कितनी स्पष्ट होती हैं और जनता के साथ उसका संवाद कितना निरंतर रहता है। मीरजापुर में दिव्या मित्तल की पुरानी प्रशासनिक पहचान उनके लिए चर्चा का आधार हो सकती है, लेकिन राजनीतिक समर्थन का आकलन करने के लिए संगठन, कार्यक्रम और मतदाताओं की प्रतिक्रिया जैसे पहलुओं को भी देखना होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा के बाद राजनीति में उतरने के अपने फैसले को नई पार्टी के रूप में आगे बढ़ा दिया है। अब उनकी घोषित जननीति को राजनीतिक संगठन और चुनावी कार्यक्रम में बदलने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।















