पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के संबोधन में दिखा नेत्री का नया अंदाज, निषाद राज के जयकारे से शुरू किया भाषण

चुनार में निषाद राज की प्रतिमा के सामने दिव्या मित्तल ने भरी हुंकार, बोलीं—अब राजनीति नहीं, जननीति होगी

पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के संबोधन में दिखा नेत्री का नया अंदाज, निषाद राज के जयकारे से शुरू किया भाषण

मिर्जापुर। चुनार विधानसभा क्षेत्र के बालू घाट पर निषाद राज की प्रतिमा के समीप शनिवार को पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल अपने चुनावी प्रचार अभियान के दौरान समर्थकों के बीच नजर आईं। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत ‘जय निषाद राज’ के उद्घोष के साथ की। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। दिव्या मित्तल ने लोगों से संवाद करते हुए अपनी पार्टी जनहित भारत की विचारधारा और उद्देश्यों को सामने रखा। उनके संबोधन में जनसरोकार, बदलाव और नई राजनीतिक कार्यशैली की झलक दिखाई दी।

‘अब राजनीति नहीं, जननीति होगी’

दिव्या मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि अब राजनीति नहीं, बल्कि जननीति होगी। उनके इस कथन ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने जनहित भारत पार्टी के बारे में बताते हुए जनता के बीच अपनी बात रखी और लोगों को पार्टी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया। करीब 15 दिनों से पार्टी के कार्यों और प्रचार अभियान में सक्रिय दिव्या मित्तल के भाषण में अब एक अलग आत्मविश्वास नजर आने लगा है। प्रशासनिक सेवा में जिलाधिकारी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली दिव्या मित्तल अब जनता के बीच राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका में अपनी बात रख रही हैं।

जिलाधिकारी से जननेत्री तक का सफर बना चर्चा का विषय

एक पूर्व जिलाधिकारी को जनता के बीच अपनी पार्टी के लिए समर्थन जुटाते और राजनीतिक मंच से सीधे संवाद करते देखना लोगों के लिए उत्सुकता का विषय बना हुआ है। उनके संबोधन में जिस तरह का आत्मविश्वास और जनता से जुड़ने का प्रयास दिखाई दिया, उसने समर्थकों में उत्साह पैदा किया। लोगों के बीच यह चर्चा भी रही

कि प्रशासनिक अनुभव के बाद राजनीतिक मैदान में उतरी दिव्या मित्तल किस तरह अपनी कार्यशैली और विचारों के जरिए अलग पहचान बनाती हैं। उनके अभियान को लेकर क्षेत्र में बदलाव की उम्मीदें भी व्यक्त की जा रही हैं। हालांकि, इन उम्मीदों को चुनावी समर्थन में बदलना उनके सामने बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल चुनार के बालू घाट पर उनका संबोधन इस बात का संकेत देता नजर आया कि वह अब प्रशासनिक पहचान से आगे बढ़कर जननेता के रूप में अपनी जगह बनाने की दिशा में सक्रिय हैं।

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