वनवासी ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कीं

एपेक्स आयुर्वेदिक टीम ने विश्व आयुर्वेद परिषद के सहयोग से वनवासी ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कीं*

चुनार, मिर्जापुर। विश्व आयुर्वेद परिषद के तत्वावधान में आयोजित “कामदगिरि महर्षि वाल्मीकि वनांचल स्वास्थ्य सेवा यात्रा” में एपेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड हॉस्पिटल, चुनार की टीम ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की सीमावर्ती वनवासी क्षेत्रों में निःशुल्क आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कीं।
इस सेवा यात्रा का नेतृत्व पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. भावना द्विवेदी, कायचिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. पी.के. राय, शल्य तंत्र विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक पाठक एवं डॉ. निलेश दुबे के निर्देशन में किया गया। इस अभियान में संस्थान के बीएएमएस 2020 बैच के छात्र-छात्राओं के साथ अनुभवी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
स्वास्थ्य सेवा यात्रा के अंतर्गत चित्रकूट, मानिकपुर तथा वनवासी कल्याण केंद्र, मानिकपुर के अंतर्गत चयनित 80 वनवासी ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क आयुर्वेदिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। इन क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को देखते हुए ग्रामीणों एवं वनवासी परिवारों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया तथा आवश्यक आयुर्वेदिक औषधियों का निःशुल्क वितरण किया गया। इस सेवा अभियान के माध्यम से हजारों ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ मिला तथा आयुर्वेद के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण प्रयास किया गया।
इस अवसर पर पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी चित्रकूट, डॉ महेंद्र त्रिपाठी, मुख्य चिकित्साधिकारी चित्रकूट, डॉ. पंकज भाटिया (अखिल भारतीय आरोग्य प्रमुख), मनोज जी (क्षेत्र संपर्क प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पूर्वी उत्तर प्रदेश), डॉ. कमलेश द्विवेदी (सदस्य, राष्ट्रीय आयोग भारतीय चिकित्सा पद्धति, नई दिल्ली) एवं डॉ. मनीष मिश्रा (संयोजक, कामदगिरि वनांचल स्वास्थ्य सेवा यात्रा) की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने सेवा दल के कार्यों की सराहना करते हुए वनवासी क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
एपेक्स ग्रुप के चेयरमैन प्रो. डॉ. एस.के. सिंह, डीन प्रो. डॉ. सुनील मिस्त्री एवं आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. पी.के. सिंह ने सेवा दल के समर्पण एवं प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वनवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना समाज के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि जनकल्याण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने सेवा यात्रा को सफल बनाने वाले सभी चिकित्सकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों को बधाई देते हुए भविष्य में भी ऐसे जनसेवा अभियान निरंतर संचालित करने का संकल्प व्यक्त किया।

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