1 दिसम्बर से ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का विरोध तेज, ग्राम पंचायत अधिकारी उतरे आंदोलन पर

मिर्जापुर ग्राम पंचायत अधिकारी के द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक
प्रदेशभर के ग्राम पंचायत अधिकारी 1 दिसम्बर से लागू की जा रही ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के विरोध में क्रमिक एवं सांकेतिक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। संगठन ने शासन पर आरोप लगाया है कि बिना आवश्यक संसाधन और सुविधाएँ उपलब्ध कराए इस प्रणाली को थोपने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे基层 स्तर पर कार्य प्रणाली प्रभावित होगी।

संगठन द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि शासन के विशेष सचिव द्वारा 3 नवम्बर 2025 को जारी आदेश के बाद जिलों में आनन-फानन में ऑनलाइन उपस्थिति लागू कराई जा रही है, जबकि अधिकांश विकासखंडों में इंटरनेट, बिजली, कार्यालय व्यवस्था और सुरक्षित कार्यस्थल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

ग्राम पंचायत अधिकारी संघ का कहना है कि पंचायत सहायक/अकाउंटेंट-कम-डेटा एंट्री ऑपरेटर प्रणाली लागू होने के बाद कई ग्राम पंचायतों का कार्यभार असंतुलित हो गया है। सचिवों से मूल विभागीय कार्यों के अतिरिक्त विभिन्न विभागों के दायित्व भी निभाने को कहा जा रहा है, जिससे कार्यकुशलता प्रभावित हो रही है। संगठन ने आरोप लगाया कि तमाम पत्र भेजने के बावजूद शासन ने अब तक कोई ठोस वार्ता नहीं की है।

चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा घोषित

संघ ने आंदोलन के लिए विस्तृत क्रम जारी किया है।

01 से 04 दिसम्बर तक
सभी ग्राम पंचायत अधिकारी अपने कार्यस्थल पर ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का विरोध करते हुए काली पट्टी बाँधकर शासकीय कार्य करेंगे।

05 दिसम्बर को
प्रदेश के सभी 826 विकासखंडों में सचिव दोपहर 1 बजे तक शांतिपूर्ण धरना देंगे।

10 दिसम्बर को
सचिव न्यूनतम माइलेज भत्ता (₹200 मासिक) बढ़ाने तथा सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने की माँग के प्रतीक स्वरूप “पहिया वाहन बंद” कर साइकिल से विकासखंड पहुँचेंगे। संगठन का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर शासन को साइकिल भत्ता भी लागू करना चाहिए।

15 दिसम्बर को
ग्राम पंचायतों में लागू ई-गेटवे सिस्टम, मोबाइल ऐप, वेबसाइट आधारित भुगतान प्रक्रिया का विरोध किया जाएगा। सचिव अपने-अपने विकासखंडों पर एकत्र होकर इस प्रणाली को अव्यवहारिक बताते हुए ज्ञापन सौंपेंगे।

समाधान नहीं तो बड़ा आंदोलन

संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शासन प्रशासन संवाद कर समाधान नहीं निकालता तो यह सांकेतिक आंदोलन बड़े व्यापक आंदोलन में बदल सकता है। प्रेस नोट में कहा गया है कि सचिव लगातार बढ़ते कार्यभार, ऑनलाइन दबाव, संसाधनों की कमी और असुरक्षित कार्यस्थलों से जूझ रहे हैं। ऐसे में एकतरफा आदेशों से कार्य व्यवस्था चरमरा सकती है।

संगठन ने कहा—
“यदि शासन सकारात्मक वार्ता करता है तो स्वागत है, अन्यथा सचिवों की समस्याएँ बड़े आंदोलन, धरने और कार्य बहिष्कार में बदल सकती हैं, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”