
ऊर्जा विभाग के संविदा कर्मियों को आउटसोर्सिंग निगम में शामिल करने की मांग तेज, आंदोलन की चेतावनी
मिर्जापुर/लखनऊ, 06 अप्रैल 2026।
ऊर्जा विभाग के संविदा कर्मियों को राज्य सरकार द्वारा गठित आउटसोर्सिंग निगम में शामिल किए जाने की मांग को लेकर मामला तेज हो गया है। इस संबंध में उ0प्र0 पावर कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के माध्यम से प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर मांग उठाई गई है।
पत्र में बताया गया है कि प्रदेश के विभिन्न विद्युत वितरण निगमों में लगभग 78 हजार संविदा कर्मी कार्यरत हैं, जिन्हें आउटसोर्सिंग निगम के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। इससे इन कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उन्हें आउटसोर्सिंग निगम में शामिल नहीं किया गया, तो वे कई महत्वपूर्ण सुविधाओं से वंचित रह जाएंगे।
कर्मचारियों ने अपनी मांगों में कहा है कि आउटसोर्सिंग नियमों के तहत निर्धारित मानक वेतन का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा विभाग से सीधे भुगतान की सुविधा भी उन्हें नहीं मिलती और वर्तमान में ठेकेदारों के माध्यम से ही भुगतान किया जा रहा है। ईपीएफ का भुगतान भी विभाग द्वारा सीधे किए जाने की मांग उठाई गई है, जबकि अभी यह व्यवस्था ठेकेदारों के जरिए संचालित हो रही है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में संविदा कर्मियों की मनमानी छंटनी की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे उनकी सेवा सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। आउटसोर्सिंग निगम में शामिल किए जाने से उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सेवा स्थिरता मिलने की उम्मीद है।
महासंघ की ओर से सरकार से मांग की गई है कि संविदा कर्मियों को शोषण से बचाने, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा एवं सेवा स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें आउटसोर्सिंग निगम में शामिल किया जाए।
साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। इसके तहत 21 अप्रैल 2026 को प्रदेश के प्रत्येक जनपद में एक दिवसीय सत्याग्रह और 7 मई 2026 को हर जिले में एक दिवसीय कार्य बहिष्कार किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया जा सकता है।















