
रोटावायरस वैक्सीन की कमी से नवजात टीकाकरण प्रभावित, आंगनबाड़ी केंद्र पर Rota-1 न लगने पर सवाल
मिर्जापुर। जनपद में नवजात शिशुओं के टीकाकरण को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के त्रिमोहानी क्षेत्र स्थित एक आंगनबाड़ी केंद्र पर तैनात एएनएम द्वारा बच्चों को निर्धारित समय पर लगने वाला रोटावायरस वैक्सीन (Rota-1) नहीं लगाया गया। अभिभावकों को बताया गया कि जिले भर में रोटावेट वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण टीकाकरण नहीं हो सका।
स्वास्थ्य विभाग और सरकार की ओर से लगातार यह दावा किया जाता रहा है कि नवजात शिशुओं के लिए सभी आवश्यक टीके और दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। ऐसे में जमीनी स्तर पर वैक्सीन की कमी का सामने आना विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, डेढ़ माह (लगभग 6 सप्ताह) की आयु में बच्चों को रोटावायरस वैक्सीन का पहला डोज दिया जाना अनिवार्य होता है, जो गंभीर डायरिया जैसी बीमारी से बचाव के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र पर कई बच्चों को यह टीका नहीं लग पाया, जिससे अभिभावकों में चिंता व्याप्त है।
स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब एक माह बाद अभिभावकों को मंडली जिला चिकित्सालय पहुंचकर नवजात शिशु को रोटावायरस का टीका लगवाना पड़ा। इस देरी के कारण बच्चों का पूरा टीकाकरण शेड्यूल भी प्रभावित हो गया। अभिभावकों का आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्र पर तैनात एएनएम द्वारा इस संबंध में स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी गई, जिससे उन्हें असमंजस और उहापोह की स्थिति का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर टीकाकरण नहीं हुआ तो बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित कर छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण कराया जाए।
वहीं, इस मामले में जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करता है और नवजात बच्चों के टीकाकरण को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।















