
नगर पालिका अध्यक्ष के प्रयासों का दिखा असर, ऐतिहासिक घंटाघर को मिलेगा मूल स्वरूप
दिल्ली से आई आर्किटेक्ट्स की टीम ने किया निरीक्षण, जल्द तैयार होगी डीपीआर
मीरजापुर। नगर के हृदय स्थल और ऐतिहासिक पहचान माने जाने वाले घंटाघर के संरक्षण एवं पुनर्स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के लगातार प्रयासों के बाद अब घंटाघर को उसके मूल ऐतिहासिक स्वरूप में लौटाने की कवायद तेज हो गई है।
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्याम सुंदर केशरी के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश सरकार के पुरातत्व विभाग ने संज्ञान लेते हुए घंटाघर के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया है। इसी क्रम में पुरातत्व विभाग के निर्देश पर दिल्ली से विशेषज्ञ आर्किटेक्ट्स की एक टीम ने शुक्रवार को ऐतिहासिक घंटाघर का विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने घंटाघर की संरचना, वास्तुकला, क्षतिग्रस्त हिस्सों तथा उसकी मूल डिजाइन का बारीकी से अध्ययन किया। टीम द्वारा फोटोग्राफी, मापन और संरचनात्मक परीक्षण के माध्यम से आवश्यक तकनीकी जानकारी एवं साक्ष्य एकत्र किए गए।
जानकारी के अनुसार निरीक्षण के आधार पर जल्द ही एक विस्तृत डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर पुरातत्व विभाग को सौंप दी जाएगी। प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत घंटाघर को उसके ऐतिहासिक एवं मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित किया जाएगा, जिससे शहर की इस महत्वपूर्ण धरोहर को उसका पुराना वैभव वापस मिल सके।
उल्लेखनीय है कि ऐतिहासिक घंटाघर की घड़ी वर्षों से बंद पड़ी हुई है। कभी यह घड़ी शहर की पहचान और समय निर्धारण का प्रमुख माध्यम हुआ करती थी। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्याम सुंदर केशरी ने कहा कि उनकी मंशा घंटाघर को केवल एक इमारत के रूप में संरक्षित करने की नहीं, बल्कि इसे शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विकसित करने की है। उन्होंने बताया कि डीपीआर स्वीकृत होते ही जीर्णोद्धार कार्य तेजी से प्रारंभ कराया जाएगा।
घंटाघर के पुनरुद्धार की पहल से नगरवासियों में खुशी और उत्साह का माहौल है। लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही मीरजापुर का यह ऐतिहासिक गौरव अपने पुराने स्वरूप और चमक के साथ फिर दिखाई देगा।















