
अष्टभुजा पहाड़ पर अवैध कब्जे का जाल, दिन-रात हो रहा निर्माण; श्रद्धालुओं और पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश
मिर्जापुर। विंध्याचल धाम की धार्मिक पहचान माने जाने वाले अष्टभुजा पर्वत पर कथित अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं तथा पर्यावरण प्रेमियों में गहरी चिंता व्याप्त है। लोगों का कहना है कि प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व वाले इस पर्वत पर लगातार निर्माण कार्य होने के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
अष्टभुजा पर्वत केवल एक पहाड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। विंध्यवासिनी धाम, कालीखोह और अष्टभुजा देवी को जोड़ने वाले धार्मिक त्रिकोण का यह महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में पर्वत पर बढ़ते निर्माण कार्यों को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस संवेदनशील क्षेत्र की निगरानी कौन कर रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पर्वत पर दिन-रात निर्माण कार्य जारी है। कई स्थानों पर बड़े-बड़े पक्के भवन खड़े हो गए हैं और नए निर्माण भी लगातार किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में अष्टभुजा पर्वत का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पहाड़ों पर अनियंत्रित निर्माण से भू-संतुलन, हरित क्षेत्र और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वहीं श्रद्धालुओं का मानना है कि धार्मिक महत्व वाले इस पर्वत की मूल पहचान और पवित्रता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
लोगों ने सवाल उठाया है कि जब निर्माण कार्य खुलेआम हो रहे हैं तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है। लोगों के अनुसार पुलिस, स्थानीय चौकी, राजस्व विभाग, वन विभाग और अन्य जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। यदि निर्माण अवैध है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और यदि वैध है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही।

श्रद्धालुओं एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अष्टभुजा पर्वत पर हो रहे निर्माण कार्यों का सत्यापन कराने तथा अवैध निर्माण पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि विंध्याचल की धार्मिक और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना प्रशासन और समाज, दोनों की साझा जिम्मेदारी है। निर्माण करने वाले लोग ना ग्रीन जोन की चिंता कर रहे हैं और ना ही धार्मिक क्षेत्र की चिंता कर रहे हैं कई बिल्डिंग तो बन के तैयार हो चुके लेकिन अभी भी कुछ बनने की प्रक्रिया में है बंगाली माता आश्रम के आसपास भी हो रहे निर्माण की चर्चा जोरो पर है जबकि मोतिया तालाब जाने वाले रास्ते पर भी कई पक्के भवन बनकर तैयार हो चुके हैं अष्टभुजा डाक बंगला के नजदीक भी अवैध रूप से बाउंड्री कर ली गई है।











