जनता का विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत- पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल

जनता का विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत, इसी ने IAS छोड़ राजनीति में आने का साहस दिया: दिव्या मित्तल

पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने इंटरव्यू में बताया राजनीति में आने का उद्देश्य, जननीति भारत के माध्यम से जनता की आवाज को नीतियों के केंद्र में लाने का संकल्प

मिर्जापुर। पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल का प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आने का फैसला केवल एक पद छोड़ने का निर्णय नहीं, बल्कि जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और जनसेवा के व्यापक संकल्प को दर्शाता है। एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने सरकारी पद छोड़कर चुनावी राजनीति में उतरने का फैसला आखिर किसकी वजह से किया, तो उनका जवाब सीधे जनता के दिल तक पहुंचने वाला था। उन्होंने कहा, “यह जो पब्लिक आपके सामने खड़ी है ना, लोग जो खड़े हैं, पब्लिक की वजह से, जनता की वजह से।”

दिव्या मित्तल के इस जवाब में उनके राजनीतिक सफर की प्रेरणा और उद्देश्य दोनों स्पष्ट दिखाई देते हैं। उनके लिए राजनीति सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि आम लोगों की समस्याओं को समझने, उनकी आवाज को मजबूती देने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का रास्ता है। जनता के प्रति इसी विश्वास और समर्पण को उन्होंने अपने फैसले की असली वजह बताया।

प्रशासनिक अनुभव से जनसेवा के नए रास्ते तक

दिव्या मित्तल वर्ष 2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं। उन्होंने लगभग 13 वर्षों तक प्रशासनिक सेवा में रहते हुए विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। मिर्जापुर की जिलाधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से चर्चित रहा। जिले के दूरस्थ लहुरियादह गांव में पेयजल की समस्या के समाधान के लिए पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की पहल ने उन्हें व्यापक जनचर्चा में ला दिया था। इस प्रयास ने यह संदेश दिया कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता से कठिन परिस्थितियों में भी बदलाव संभव है।

मिर्जापुर के अलावा उन्होंने देवरिया और संत कबीर नगर सहित कई जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं। IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से शिक्षा प्राप्त करने वाली दिव्या मित्तल का प्रशासनिक अनुभव और जनसमस्याओं को करीब से देखने का अवसर उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को एक नई दिशा देता है।

उनका मानना है कि जनता की वास्तविक जरूरतों को समझे बिना नीतियां बनाने से समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इसी सोच के साथ उन्होंने जननीति भारत पार्टी के माध्यम से राजनीति में कदम रखा है। पार्टी का उद्देश्य जनता को निर्णय प्रक्रिया में भागीदार बनाना, आम नागरिकों की जरूरतों के अनुसार नीतियां तैयार करना और शासन को जवाबदेह बनाना है।

दिव्या मित्तल का यह सफर उन लोगों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो जनसेवा को केवल सरकारी पद तक सीमित नहीं मानते। उनका जनता के बीच पहुंचना और सीधे लोगों से संवाद करना इस बात को रेखांकित करता है कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता में निहित है।

इंटरव्यू में उनके द्वारा दिया गया जवाब उनके राजनीतिक अभियान का सार भी है। सरकारी पद छोड़ने के बाद भी जनसेवा को जारी रखने का उनका संकल्प और जनता के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानना उन्हें एक अलग पहचान देता है। जननीति भारत के माध्यम से दिव्या मित्तल अब जनता की समस्याओं को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने और जनभागीदारी पर आधारित व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रही हैं।

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