
विविध परंपराओं के रंगों से सजा डैफोडिल्स का वार्षिकोत्सव ‘अस्मिता’
‘विविध परंपराएँ, एक उत्सव’ की थीम पर विद्यार्थियों ने बिखेरे सांस्कृतिक रंग, छह जरूरतमंद बेटियों को मिली साइकिल
मिर्जापुर, 4 नवंबर। डैफोडिल्स पब्लिक स्कूल, संकट मोचन शाखा का वार्षिकोत्सव ‘अस्मिता’ बुधवार को लोहिया तालाब परिसर में भव्यता के साथ आयोजित हुआ। ‘विविध परंपराएँ, एक उत्सव’ की थीम पर आधारित समारोह में भारतीय संस्कृति, लोककलाओं, प्रतिभा और एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। विद्यार्थियों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने जहां दर्शकों का मन मोह लिया, वहीं जरूरतमंद बेटियों को साइकिल प्रदान कर विद्यालय ने सामाजिक सरोकारों की भी प्रेरणादायी मिसाल पेश की।
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि बिंदु सैनी, विद्यालय की निर्देशक अपराजिता सिंह, अमरदीप सिंह, साहिबा एवं काशिका, संकट मोचन शाखा की प्रधानाचार्या पूजा अग्रवाल, नारघाट एवं लोहिया तालाब शाखा के प्रधानाचार्यों व उप-प्रधानाचार्या तथा प्रशासक मिठ्ठू बनर्जी और सिंघानिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
छह बेटियों को मिली ‘पंखों की उड़ान’
कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय की सामाजिक पहल ‘शेयर एंड केयर’ के अंतर्गत छह जरूरतमंद एवं होनहार बेटियों को साइकिल प्रदान की गई। शिक्षा की राह में दूरी बाधा न बने, इस उद्देश्य से बेटियों को ‘पंखों की उड़ान’ के रूप में साइकिल भेंट की गईं। तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के दौरान कुल 19 बेटियों की शिक्षा को निरंतर आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ यह सहयोग किया जा रहा है। विद्यालय की इस पहल ने समारोह को सामाजिक संवेदना और जिम्मेदारी का विशेष आयाम प्रदान किया।
लोकसंस्कृति और कला का मनमोहक संगम
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत ‘फैंटेसी लैंड’ से हुई। प्री-प्राइमरी के नन्हे विद्यार्थियों ने परियों, कल्पनाओं और अलादीन की जादुई कथा के माध्यम से दर्शकों को सपनों की दुनिया में पहुंचा दिया। इसके बाद यूकेजी से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों ने गोवा, पंजाब, असम, बंगाल और कश्मीर की सांस्कृतिक झलकियां प्रस्तुत कीं।
महाराष्ट्र का प्रसिद्ध गोंधल नृत्य, गुजरात का गरबा और राजस्थान का कालबेलिया नृत्य समारोह के प्रमुख आकर्षण रहे। विभिन्न राज्यों के पारंपरिक परिधानों, लोककलाओं और रीति-रिवाजों से सजी प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति की विविधता को जीवंत कर दिया। विद्यार्थियों ने संदेश दिया कि भाषाएं, परंपराएं और त्योहार भले ही अलग हों, लेकिन भारतीयता की भावना सभी को एक सूत्र में बांधती है।
शास्त्रीय नृत्य कथक की प्रस्तुति ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वहीं ‘महादेव से महाकाल’ की भक्तिमय प्रस्तुति के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य समापन हुआ। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का वातावरण रच दिया।
सर्वांगीण विकास पर विद्यालय का जोर
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ कराटे, स्काउट्स, योग, ऑर्केस्ट्रा, गायन एवं अन्य कौशल आधारित गतिविधियों का प्रदर्शन भी किया गया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों के अनुशासन, शारीरिक दक्षता, टीमवर्क, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता की झलक देखने को मिली।
प्रधानाचार्या पूजा अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक उत्कृष्टता हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का ऐसा संपूर्ण व्यक्तित्व विकसित करना है, जो आत्मविश्वासी, जिम्मेदार, रचनात्मक और अपनी संस्कृति से जुड़ा हो। प्रत्येक बच्चे में अनूठी प्रतिभा होती है और हर परंपरा अपने भीतर मूल्यवान सीख समेटे हुए है।
सामूहिक प्रयास से यादगार बना आयोजन
कार्यक्रम की सफलता में सांस्कृतिक विभाग की प्रभारी राधा गुप्ता, कार्यक्रम संचालिका बलजीत कौर, नृत्य प्रशिक्षक शिवम, आईटी प्रभारी इक़रा अंजुम, वेशभूषा प्रभारी प्रतिमा, कला एवं शिल्प प्रभारी स्वाति तथा संगीत विभाग प्रभारी मुस्तकीम का विशेष योगदान रहा।
इसके साथ शोभित, कृष्णा, अभिनव, अभिषेक, हर्षिता, भूमिका, फ़ौज़िया, शीबा, अलंकृता, शिवांगी, पूजा सिंह, प्रियंका श्रीवास्तव, नाज़िया, इशिका, दर्शिका, दिव्या, वसुंधरा, नेहा, आदर्श, कार्तिका, रती, शाहनाज़, प्रीति, अनुष्का, यूएस पाल, सौम्या, वंदना, अरुण एवं सुरेश सहित विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों के अथक परिश्रम से आयोजन यादगार बना।
समारोह का समापन राष्ट्रगान और ‘जय हिंद’ के उद्घोष के साथ हुआ।















