
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में शुल्क नियामक समिति की बैठक, स्कूलों को पारदर्शिता के सख्त निर्देश
पूरे सत्र की फीस एक साथ लेने पर रोक, एनसीईआरटी किताबें अनिवार्य
यूनिफॉर्म बदलाव पर 5 साल की रोक, मनमानी पर होगी कड़ी कार्रवाई
मीरजापुर, 29 अप्रैल 2026 कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें जनपद के सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। बैठक में उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई और स्कूलों को शुल्क निर्धारण व वसूली को लेकर सख्त दिशा-निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि सभी विद्यालय अपनी शुल्क संरचना पारदर्शी और तर्कसंगत रखें तथा इसे स्कूल की वेबसाइट और सूचना पट्ट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। अभिभावकों से पूरे सत्र की फीस एकमुश्त नहीं ली जाएगी और हर शुल्क के बदले रसीद देना अनिवार्य होगा। साथ ही, पिछले तीन वर्षों की शुल्क सूची जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि उसकी जांच की जा सके।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। किताबें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे या अन्य सामग्री खरीदने के लिए किसी एक दुकान को अनिवार्य नहीं किया जाएगा। साथ ही, पांच वर्ष से पहले यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं किया जा सकेगा। किसी भी प्रकार का कैपिटेशन फीस लेने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
विद्यालयों को यह भी निर्देश दिया गया कि कक्षा 8 और 10 उत्तीर्ण सभी विद्यार्थियों का अगली कक्षाओं में शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित किया जाए और इसकी जानकारी प्रतिदिन शिक्षा पोर्टल पर अपडेट की जाए। छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल वाहनों का परिवहन विभाग पोर्टल पर पंजीकरण, नियमित फिटनेस और प्रदूषण प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है। साथ ही वाहन चालकों और सहयोगी स्टाफ का सत्यापन एवं सुरक्षा प्रशिक्षण भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, जिला विद्यालय निरीक्षक माया राम सहित विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।















