
डिजिटल इंडिया के दावों के बीच सूचना का अधिकार व्यवस्था सवालों के घेरे में
ऑनलाइन आवेदन के बावजूद विभागों तक नहीं पहुंच रहीं आरटीआई, आवेदक महीनों से भटकने को मजबूर
मिर्जापुर। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम आम नागरिकों को सरकारी सूचनाएं प्राप्त करने का कानूनी अधिकार देता है, लेकिन मिर्जापुर में इसकी ऑनलाइन व्यवस्था कई मामलों में प्रभावी साबित नहीं हो रही है। डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस के दावों के बीच आम नागरिक आज भी अपनी सूचना प्राप्त करने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को विवश हैं।
ताजा मामला मिर्जापुर के सिटी विकासखंड से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार एक आवेदक ने छह माह पूर्व ऑनलाइन माध्यम से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन किया और निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान भी किया। इसके बावजूद संबंधित विभाग तक आवेदन नहीं पहुंचा। लंबे समय तक सूचना न मिलने पर जब आवेदक ने स्वयं खोजबीन की तो पता चला कि उसका आवेदन सिटी विकासखंड के बजाय मड़िहान तहसील में पड़ा हुआ है।
बताया जाता है कि इस संबंध में जब मड़िहान तहसील से संपर्क किया गया तो वहां के अधिकारियों ने कहा कि उनके यहां विभिन्न विभागों से संबंधित ऐसे आवेदन पहुंच जाते हैं, जबकि उनका उन मामलों से कोई संबंध नहीं होता। इससे स्पष्ट होता है कि आवेदन सही विभाग तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिसका खामियाजा सीधे आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
इस संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय में आरटीआई व्यवस्था से जुड़े काउंटर पर जानकारी लेने पर बताया गया कि जिले में प्राप्त ऑनलाइन आरटीआई आवेदनों को चारों तहसीलों में भेज दिया जाता है। इसके बाद संबंधित तहसीलदार की जिम्मेदारी होती है कि आवेदन को संबंधित विभाग या लोक सूचना अधिकारी तक अग्रसारित करें। हालांकि, व्यवहारिक स्तर पर यह व्यवस्था कई मामलों में प्रभावी नहीं दिख रही है और आवेदन गलत स्थानों पर पड़े रहने से महीनों तक लंबित हो रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि यदि ऑनलाइन आवेदन सही विभाग तक समयबद्ध तरीके से नहीं पहुंचते हैं तो सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य ही प्रभावित होता है। इससे नागरिकों का समय और धन दोनों व्यर्थ होते हैं तथा शासन की डिजिटल सेवाओं पर भी सवाल खड़े होते हैं।
ऐसे में आवश्यकता है कि ऑनलाइन आरटीआई प्रणाली की समीक्षा कर आवेदन सीधे संबंधित विभाग और लोक सूचना अधिकारी तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आम नागरिकों को अपने संवैधानिक अधिकार के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े।









