
डैफोडिल्स पब्लिक स्कूल में धूमधाम से मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
भक्ति, संस्कृति और कृष्ण की लीलाओं ने मोहा मन
मिर्जापुर। डैफोडिल्स पब्लिक स्कूल एंड हॉस्टल, लोहिया तालाब की तीनों शाखाओं में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास, भक्ति और सांस्कृतिक रंगों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण से हुई।

इस दौरान नन्हे-मुन्ने छात्र-छात्राएं श्रीकृष्ण, राधा रानी, यशोदा मैया, माखन चोर, सुदामा और ग्वाल-बाल के मनमोहक रूपों में नजर आए। बच्चों की आकर्षक वेशभूषा ने सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित सजीव झांकियां प्रस्तुत की गईं। इनमें कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म, वासुदेव जी द्वारा यमुना पार कराना और श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। बच्चों ने कथक नृत्य पर आधारित भावपूर्ण नृत्य-नाटिका भी प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बाल गोपाल को झूला झुलाने का रहा। फूलों से सजे झूले पर भगवान श्रीकृष्ण को विराजमान कर बच्चों और शिक्षकों ने बारी-बारी से झूला झुलाया। इस दौरान “नंद घर आनंद भयो” के जयकारों से पूरा विद्यालय परिसर गूंज उठा। इसके बाद सामूहिक रूप से श्रीकृष्ण की आरती की गई।

विद्यालय की डायरेक्टर अपराजिता ने अपने संबोधन में भगवान श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व और उनके जीवन संदेश पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म, कर्म, प्रेम, त्याग, मित्रता और नेतृत्व की सीख देता है। गीता के उपदेश आज भी कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग दिखाते हैं। बाल रूप में उनकी नटखट लीलाएं, सुदामा के प्रति उनकी मित्रता और योगेश्वर के रूप में उनका गीता ज्ञान जीवन जीने की कला सिखाता है।















