
“मिर्जापुर का पानी किसने रोका?”—दिव्या मित्तल के तेवर का ढाई साल पुराना वीडियो फिर सुर्खियों में
भरी बैठक में अधिकारी से पूछे थे तीन सीधे सवाल, बोलीं—मिर्जापुर को पानी कम और गैर जनपद को ज्यादा देने का फैसला आखिर किसने किया?
मीरजापुर। लगभग ढाई वर्ष पुराना एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर फिर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में तत्कालीन मीरजापुर जिलाधिकारी दिव्या मित्तल अधिकारियों, किसानों और कर्मचारियों के साथ बैठक करती नजर आ रही हैं। बैठक में जनपद की पानी की जरूरत और पानी के वितरण को लेकर उनके तेवर अचानक तल्ख हो जाते हैं। अधिकारी द्वारा रोस्टर के विपरीत गैर जनपद को पानी दिए जाने की जानकारी सामने आने पर दिव्या मित्तल ने जिस अंदाज में सवाल उठाए, उसे लोग आज उनके इस्तीफे के बाद एक अलग नजरिए से देख रहे हैं।
वीडियो में दिव्या मित्तल संबंधित अधिकारी से लगातार तीन सवाल करती दिखाई देती हैं। उनका सवाल था कि किस-किस ने तय किया कि मीरजापुर को पानी नहीं दिया जाए और गैर जनपद को पानी दिया जाए? किसके आदेश से मीरजापुर का पानी रोका गया? और आखिर यह निर्णय लेने का अधिकार किसने दिया कि मीरजापुर को कम और गैर जनपद को अधिक पानी दिया जाए?
“पानी सबको चाहिए, लेकिन फैसला नियम से होगा”
दिव्या मित्तल का तेवर केवल किसी अधिकारी को फटकार लगाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पानी की जरूरत हर जनपद को है और गैर जनपद को पानी जाना अपने आप में गलत नहीं है। सवाल यह है कि जब मीरजापुर स्वयं पानी की जरूरत से जूझ रहा हो, तब रोस्टर और निर्धारित व्यवस्था को दरकिनार कर कोई अधिकारी अपने स्तर से पानी के वितरण का फैसला कैसे कर सकता है।
उनका जोर इस बात पर था कि जनपद के संसाधनों और अधिकारों से जुड़े मामलों में नियम और निर्धारित व्यवस्था का पालन होना चाहिए। जिलाधिकारी के रूप में उन्होंने कई मौकों पर मीरजापुर को प्राथमिकता दिए जाने और अधिकारियों को नियमों के दायरे में काम करने की बात कही थी।
इस्तीफे के बाद क्यों बढ़ी पुराने वीडियो की चर्चा?
दिव्या मित्तल के हालिया इस्तीफे के बाद यह पुराना वीडियो एक बार फिर लोगों का ध्यान खींच रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो देखने वाले लोग उनके प्रशासनिक अंदाज, स्पष्टवादिता और अधिकारियों से सीधे सवाल करने की शैली को याद कर रहे हैं। खास बात यह है कि जिस समय यह वीडियो सामने आया था, तब यह एक प्रशासनिक बैठक का हिस्सा था, लेकिन आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। ऐसे में वही वीडियो दिव्या मित्तल के व्यक्तित्व और उनके कार्यशैली के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर चर्चा करने वाले लोगों का कहना है कि करीब ढाई वर्ष पुराने इस वीडियो में दिखाई देने वाला उनका तेवर आज इसलिए भी प्रासंगिक लग रहा है क्योंकि पद छोड़ने के बाद उनके अगले कदम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। वीडियो को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए नियमों और जनहित को लेकर जिस बेबाकी से वह सवाल उठाती थीं, वही अंदाज उनकी सार्वजनिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
एक वीडियो ने फिर जगा दी “तेजतर्रार डीएम” की याद
वीडियो की सबसे खास बात यही है कि इसमें दिव्या मित्तल किसी राजनीतिक मंच पर नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक बैठक में जिलाधिकारी की भूमिका में दिखाई देती हैं। वह व्यवस्था को लेकर सवाल करती हैं और यह जानना चाहती हैं कि जनपद के हिस्से के पानी के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार किसे था।
यही वजह है कि ढाई वर्ष पुराना यह वीडियो आज की परिस्थितियों में लोगों को फिर आकर्षित कर रहा है। मीरजापुर के लोग जहां उनके कार्यकाल के इस अंदाज को याद कर रहे हैं, वहीं उनके इस्तीफे के बाद उनके आगामी सार्वजनिक और राजनीतिक कदमों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पुराने वीडियो ने इन चर्चाओं को एक नया संदर्भ जरूर दे दिया है।













