
*विश्व अंगदान दिवस पर एपेक्स ट्रस्ट संस्थानों में जागरूकता सत्र का आयोजन*
*बहन बनी भाई की जीवनदाता, एपेक्स में सफल किडनी ट्रांसप्लांट की प्रेरक कहानी*
चुनार, मिर्जापुर। विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर एपेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड हॉस्पिटल, चुनार के रचना शरीर विभाग द्वारा चेयरमैन प्रो. डॉ. एस.के. सिंह की संरक्षता में अंगदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम भय से विश्वास और आशा की ओर अंगदान के माध्यम से जीवन बचाने का संकल्प तथा संदेश अंगदान महादान-जीवनदान सबसे महान रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एपेक्स की निदेशिका एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकिता पटेल, रचना शरीर विभागाध्यक्ष प्रो. पी.एस. पांडेय, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आशीष यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विंध्या पांडेय, कायचिकित्सा डॉ गौरी चौहान, शल्य तंत्र डॉ निलेश दुबे, डॉ अभिषेक पाठक एवं सहित विभिन्न विभागों के चिकित्सकों एवं संकाय सदस्यों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन एवं भगवान धन्वंतरि वंदना के साथ हुआ।
कार्यक्रम में 21 वर्षीय अनुज विशेष रूप से उपस्थित हुए, जिन्होंने बहन ने दी अपनी किडनी, भाई को मिली नई ज़िंदगी की प्रेरणादायक कहानी साझा करते हुए अंगदान से जुड़े अपने अनुभव विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ साझा किए। उनके अनुभव ने उपस्थित लोगों को अंगदान के मानवीय महत्व और जीवन बचाने की इसकी शक्ति को करीब से समझने का अवसर प्रदान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. अंकिता पटेल ने कहा कि अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना आज की महत्वपूर्ण सामाजिक आवश्यकता है। सही जानकारी और सकारात्मक सोच से अंगदान को लेकर समाज में व्याप्त भय एवं भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं जागरूक बनने तथा परिवार और समाज तक अंगदान का संदेश पहुंचाने की अपील की।
एपेक्स डीन प्रो. डॉ. सुनील मिस्त्री एवं आयुर्वेद प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. पी.के. सिंह ने अंगदान की आवश्यकता एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंगदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में नई आशा और नई जिंदगी का संचार कर सकता है।
इस अवसर पर BAMS 2025 बैच के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक/स्किट एवं पोस्टर प्रेजेंटेशन के माध्यम से अंगदान के महत्व, मानवीय संवेदना एवं जीवन बचाने के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय प्रो. डॉ. पी.एस. पांडेय, डॉ. आशीष कुमार यादव एवं डॉ. विंध्या पांडेय, डॉ ओम हर्ष यति द्वारा किया गया।















