
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना से किसानों की आर्थिक समृद्धि के खुले द्वार*
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*दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीणों की आय दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित हो रही योजना* 
*242 लाभार्थियों को आज वितरित किए जाएंगे चयन पत्र*
मीरजापुर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए ‘मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना’ की शुरुआत की। यह योजना से किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में कारगार साबित हो रही है। अभी तक जिले में इस योजना से 148 किसान लाभान्वित हो चुके हैं। यह किसान उन्नत नस्ल की गायों का पालन कर प्रतिमाह हजारों रुपये की आमदनी कर रहे हैं। मौजूदा वित्त वर्ष के 242 लाभार्थी किसानों को मंगलवार को चयन पत्र वितरित किए जाएंगे।
नंदबाबा दुग्ध मिशन के नोडल अधिकारी मनोज दुबे ने बताया कि इस योजना के तहत पशुपालकों को उन्नत नस्ल की 02 स्वदेशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए 80 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। योजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत नस्ल की स्वदेशी गौवंश को बढ़ावा देना जिससे ज्यादा दुग्ध उत्पादन के साथ साथ संकर नस्ल की गायों में फैल रही तरह तरह की बीमारियों जैसे लम्पी रोग आदि से निजात दिलाते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है।श्री दुबे द्वारा बताया कि इस योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को दो उन्नत नस्ल की स्वदेशी गायों की इकाई लगानी होगी। इसकी कुल स्थापना लागत का 40 प्रतिशत या अधिकतम 80,000 रुपये तक का अनुदान शासन द्वारा सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। बताया कि सरकार ने इस योजना में महिला सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी है। कुल निर्धारित लक्ष्य का 50 प्रतिशत हिस्सा केवल महिला दुग्ध उत्पादकों और महिला पशुपालकों के लिए आरक्षित किया गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में बहुत मदद मिलेगी।
*गो-पालन से खुले आत्मनिर्भरता के द्वार*
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना के लाभार्थी मिश्रपुर,खेंरा जिगना निवासी अशोक कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने साहीवाल नस्ल की दो गायें खरीदी। वर्तमान में वह प्रतिदिन 16 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। उन्नत नस्ल की गाय पालने से उनकी आय में सवा लाख रुपये प्रतिवर्ष का इजाफा हुआ। यह योजना किसानों के लिए बहुत लाभकारी है। वहीं, अनंतरामपट्टी निवासी पंकज कुमार ने बताया कि इस योजना का लाभ उठाकर उन्होंने दो उन्नत नस्ल की गाय पालीं। वे घर की जरूरत के अतिरिक्त दूध को पराग की समिति जो गांव में ही खुली है उसमें बेच देते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें प्रतिमाह 5-6 हजार रुपये की आमदनी भी हो रही है। गांव में समिति होने से दूध बेचने के लिए कहीं दूर नहीं जाना पड़ता है साथ ही पूरी पारदर्शिता के साथ हर सप्ताह दूध का भुगतान भी प्राप्त हो जाता है। यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में बहुत हद तक कारगर है। 
*242 लाभार्थियों को आज बांटे जाएंगे चयन पत्र*
नंदबाबा दुग्ध मिशन के नोडल अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत 121 महिला व 121 पुरुष लाभार्थियों को मंगलवार को दुग्ध विकास कार्यालय में चयन पत्र वितरित किए जाएंगे। जिसके बाद शासन द्वारा डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खाते में अनुदान राशि भेजी जाएगी। सभी लाभार्थियों को इसके लिए सूचित कर दिया गया है।
*सिर्फ उन्नत नस्ल की गायों की खरीद पर मिलेगा लाभ*
योजना के नियमों के मुताबिक, पशुपालकों को दूसरे राज्यों से गिर, साहीवाल, थारपारकर और हरियाणा जैसी उन्नत नस्ल की स्वदेशी गायें खरीदनी होंगी। सरकार ने शर्त रखी है कि खरीदी जाने वाली गायें केवल प्रथम या द्वितीय ब्यांत की ही होनी चाहिए ताकि दुग्ध उत्पादन का अधिकतम लाभ मिल सके। इससे प्रदेश में दूध की किल्लत दूर होगी और शुद्ध स्वदेशी दूध की उपलब्धता बढ़ेगी।















