पूर्व डीएम दिव्या मित्तल का मिर्जापुर दौरा बना चर्चा का विषय

पूर्व डीएम दिव्या मित्तल के तीन दिवसीय मिर्जापुर प्रवास से बढ़ी हलचल, मां विंध्यवासिनी के चरणों में मत्था टेककर किया आगाज

मिर्जापुर। विश्वविख्यात मां विंध्यवासिनी के दरबार से गुरुवार को मिर्जापुर की पूर्व जिलाधिकारी एवं वर्तमान में राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत Divya Mittal के तीन दिवसीय मिर्जापुर प्रवास का शुभारंभ हुआ। उन्होंने मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन और हवन-अर्चन के बाद पवित्र गंगा तट पर पहुंचकर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

दिव्या मित्तल का मिर्जापुर आगमन होते ही जनपद में राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, अपने प्रवास के दौरान वह विभिन्न वर्गों के लोगों से मुलाकात कर जनपद के विकास, सामाजिक सरोकारों और जनभावनाओं से जुड़े विषयों पर संवाद कर सकती हैं।

मिर्जापुर में जिलाधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान दिव्या मित्तल ने अपनी सादगी, संवेदनशीलता, पारदर्शी कार्यशैली और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के कारण एक अलग पहचान बनाई थी। जनसुनवाई को प्राथमिकता देना, आम नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना और प्रशासन को जनता के करीब लाने के उनके प्रयासों की चर्चा आज भी लोगों के बीच होती है।

जनपद के अनेक लोगों के बीच यह धारणा देखने को मिलती है कि उन्होंने एक कर्मठ, ईमानदार और संवेदनशील प्रशासक के रूप में कार्य किया। यही कारण है कि उनके मिर्जापुर आगमन की खबर से उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में उत्साह का माहौल है।

इस बीच कुछ राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि भविष्य में वह सार्वजनिक जीवन या राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाती हैं तो मिर्जापुर की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, उनके चुनाव लड़ने अथवा किसी राजनीतिक दल से जुड़ने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में चल रही चर्चाएं केवल जनचर्चाओं और कयासों पर आधारित हैं।

जनपद में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों की ओर से यह भावना भी व्यक्त की जा रही है कि सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, संवेदनशीलता और सुशासन के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तित्वों को आगे आने का अवसर मिलना चाहिए। फिलहाल, दिव्या मित्तल के तीन दिवसीय मिर्जापुर प्रवास और उनके कार्यक्रमों पर जनपद की निगाहें टिकी हुई हैं।

“प्रशासनिक दायित्व भले बदल जाते हों, लेकिन जनता के दिलों में बनी पहचान और विश्वास लंबे समय तक कायम रहते हैं।”

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