भदोही में 50वें इंडिया कार्पेट एक्सपो का शुभारंभ, कालीन निर्यात को नई उड़ान की उम्मीद

भदोही में 50वें इंडिया कार्पेट एक्सपो का शुभारंभ, कालीन निर्यात को नई उड़ान की उम्मीद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया गोल्डन जुबली संस्करण का उद्घाटन, 32 देशों से पहुंचे 147 विदेशी खरीदार

भदोही। हस्तनिर्मित कालीनों और अन्य फ्लोर कवरिंग के क्षेत्र में भारत की समृद्ध परंपरा और बुनकरी कौशल को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाले 50वें इंडिया कार्पेट एक्सपो का रविवार को भदोही में भव्य शुभारंभ हुआ। कार्पेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (सीईपीसी) की ओर से आयोजित इस गोल्डन जुबली संस्करण का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फीता काटकर किया। भदोही में यह एक्सपो पांचवीं बार आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन समारोह में भदोही सांसद डॉ. विनोद बिंद, औराई विधायक दीनानाथ भास्कर, ज्ञानपुर विधायक विपुल दुबे, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, एमएसएमई विभाग के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल, आईईएमएल के चेयरमैन राकेश कुमार समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, निर्यातक और उद्योग जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे।

सीईपीसी के चेयरमैन कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर के साथ समिति के प्रशासनिक सदस्यों अनिल कुमार सिंह, बोधराज मल्होत्रा, दीपक खन्ना, इम्तियाज अहमद, मेहराज यासीन जान, मोहम्मद वसीफ अंसारी, पीयूष कुमार बरनवाल, रोहित गुप्ता, संजय कुमार गुप्ता और शेख आशिक अहमद सहित अन्य प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

भदोही की कालीन कला को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भदोही के कारीगरों और हस्तनिर्मित कालीनों ने उत्तर प्रदेश को दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई है। जिन हाथों ने भदोही की कालीन कला को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया है, उन्हें अब विकास, बाजार और नए अवसरों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रदेश के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसमें भदोही का कालीन उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक हस्तकला को आधुनिक तकनीक, नए डिजाइन और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कारीगरों की कला और मेहनत को पहचान के साथ बाजार उपलब्ध होने से कालीन उद्योग के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने 50वें इंडिया कार्पेट एक्सपो को कालीन उद्योग की गौरवशाली यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।

एक हजार करोड़ से अधिक के कारोबार की उम्मीद

सीईपीसी चेयरमैन कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर ने कहा कि इंडिया कार्पेट एक्सपो अंतरराष्ट्रीय कालीन खरीदारों, बाइंग हाउस, बाइंग एजेंट, आर्किटेक्ट और भारतीय कालीन निर्माताओं एवं निर्यातकों को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस एक्सपो से भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों के निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि दुनिया के विभिन्न देशों से प्रमुख खरीदार एक्सपो में पहुंचे हैं और आने वाले समय में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। एक्सपो में फॉल-विंटर सीजन के नए रंगों और डिजाइनों के हस्तनिर्मित कालीन भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

223 प्रदर्शकों ने सजाया एक्सपो

इंडिया कार्पेट एक्सपो एशिया के सबसे बड़े हस्तनिर्मित कालीन मेलों में शामिल है। इस बार 223 प्रदर्शक अपने उत्पादों के साथ भाग ले रहे हैं। एक्सपो में एक ही छत के नीचे हस्तनिर्मित कालीन, रग्स और अन्य फ्लोर कवरिंग की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध कराई गई है।

पहले दिन ही 32 देशों से 147 विदेशी कालीन खरीदार एक्सपो में पहुंचे। इनमें अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, रूस, सऊदी अरब, स्पेन, तुर्की, अमेरिका, यूएई, ब्रिटेन सहित विभिन्न देशों के खरीदार शामिल रहे। इसके अलावा 146 बाइंग प्रतिनिधियों ने भी एक्सपो में भाग लिया।

दो लाख कारीगरों और बुनकरों को मिलेगा लाभ

सीईपीसी के अनुसार हस्तनिर्मित कालीन उद्योग ग्रामीण आधारित श्रम प्रधान एमएसएमई क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस उद्योग से करीब 20 लाख बुनकरों और कारीगरों को रोजगार मिला हुआ है। विदेशी खरीदारों और भारतीय निर्माताओं के बीच सीधे व्यापारिक संबंध मजबूत होने से इसका लाभ कालीन बुनकरों और उनके परिवारों तक पहुंचने की उम्मीद है।

सीईपीसी के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने गोल्डन जुबली संस्करण को परिषद की यात्रा का गौरवपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि वर्षों में इंडिया कार्पेट एक्सपो दुनिया भर के खरीदारों और भारतीय निर्माताओं को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण वैश्विक मंच के रूप में विकसित हुआ है। ब्रिक्स देशों के खरीदारों और प्रतिनिधियों की भागीदारी से नए बाजारों में विस्तार और व्यापारिक संबंध मजबूत होने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

कालीन उद्योग के लिए अलग नीति की मांग

कार्यक्रम के दौरान अनिल कुमार सिंह ने मिर्जापुर में विंध्य एक्सप्रेस-वे मार्ग के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए माधोसिंह रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग रखी। इम्तियाज अहमद ने हस्तनिर्मित कालीनों को ओडीओपी योजना में शामिल किए जाने के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कालीन उद्योग के लिए अलग नीति बनाने की मांग की। पीयूष बरनवाल ने हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की विशिष्ट प्रकृति और लंबी उत्पादन प्रक्रिया को देखते हुए उद्योग को विशेष दर्जा देने की मांग रखी।

सीईपीसी की कार्यकारी निदेशक डॉ. स्मिता नागरकोटी ने उम्मीद जताई कि यह एक्सपो कालीन उद्योग के लिए नए मील के पत्थर स्थापित करेगा और इसका अंतिम लाभ बुनकरों तथा उनके परिवारों तक पहुंचेगा।

चार दिवसीय इंडिया कार्पेट एक्सपो 7 अक्टूबर 2026 तक व्यापारिक गतिविधियों के लिए खुला रहेगा।

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