
पूर्व IAS दिव्या मित्तल की सियासत में एंट्री, मिर्जापुर को बताया राजनीति का बड़ा केंद्र

मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी और मिर्जापुर की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा के बाद अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने का ऐलान किया है। 13 वर्ष की प्रशासनिक सेवा के बाद आईएएस पद से इस्तीफा देने वाली दिव्या मित्तल ने 29 सितंबर को सोशल मीडिया के माध्यम से अपने अगले राजनीतिक सफर की जानकारी दी।
दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जाएंगी और स्वतंत्र रूप से जनता के बीच काम करने की शुरुआत करेंगी। उन्होंने कहा कि राजनीति में उनका उद्देश्य उन लोगों की आवाज बनना है, जिनकी समस्याएं सरकारी व्यवस्था तक पहुंचने के बावजूद कई बार सुनी नहीं जातीं।
उन्होंने सड़क, शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुख विषयों के रूप में सामने रखा है। उनका कहना है कि राजनीति में आने का उद्देश्य केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाना है।
मिर्जापुर से गहरा जुड़ाव
दिव्या मित्तल का मिर्जापुर से प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान गहरा जुड़ाव रहा है। जिलाधिकारी रहते हुए वह विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और विकास से जुड़े कार्यों को लेकर चर्चा में रहीं। मिर्जापुर के एक दुर्गम गांव में पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल पहुंचाने की पहल भी उनके कार्यकाल से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियों में रही।
राजनीति में प्रवेश की घोषणा के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि दिव्या मित्तल आगामी विधानसभा चुनाव किस क्षेत्र से लड़ेंगी। हालांकि उन्होंने अभी अपनी सीट या चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है। मिर्जापुर को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने इसे राजनीति का बड़ा केंद्र बताया है और कहा है कि चुनाव कैसे और कहां से लड़ेंगी, यह आगे पता चलेगा।
इस बीच सोशल मीडिया पर कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के साथ दिव्या मित्तल की तस्वीर और पोस्टर भी सामने आया है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इससे किसी राजनीतिक गठजोड़ की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और दिव्या मित्तल ने स्वयं किसी राजनीतिक दल के साथ जाने से इनकार किया है।
दिव्या मित्तल के राजनीति में प्रवेश से उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीति में एक नया राजनीतिक अध्याय जुड़ गया है। अब निगाहें उनके संगठन, चुनावी क्षेत्र और आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हैं।















